
प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण की अग्रदूत बनीं डॉ. आरती साठे, 3 हजार से अधिक कार्यशालाओं से लाखों लोगों को किया प्रशिक्षित

रायपुर। प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण, जैविक कृषि और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली डॉ. आरती साठे पिछले डेढ़ दशक से देशभर में किसानों, महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। उन्होंने अब तक देश के विभिन्न राज्यों में 3,000 से अधिक प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का सफल आयोजन कर लाखों लोगों को प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और स्वरोजगार से जोड़ा है।

डॉ. साठे ने शासकीय मेडिकल कॉलेज, रायपुर में आठ वर्षों तक सहायक प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दी हैं। वे भारत सरकार की बायो-एंजाइम एंटरप्रेन्योर्स अकादमी (B.E.E.) से भी जुड़ी रही हैं। उन्होंने प्राकृतिक खेती, औषधीय पौधों की खेती, बांस उत्पादन, वन पुनर्स्थापना, जैविक कृषि, जैव विविधता संरक्षण तथा पर्यावरण प्रबंधन जैसे विषयों पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

उनके नेतृत्व में अब तक 1.56 लाख से अधिक किसानों को प्राकृतिक एवं रसायनमुक्त खेती का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही 2.50 लाख से अधिक औषधीय पौधों का वितरण एवं रोपण, 135 गौशालाओं का तकनीकी मार्गदर्शन तथा हजारों किसानों को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

डॉ. आरती साठे ने छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, ओडिशा, दिल्ली और असम सहित विभिन्न राज्यों के वन क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण संरक्षण प्रकोष्ठ से जुड़कर हरित गृह, शहरी बागवानी (Urban Gardening), छत पर बागवानी, कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता पर व्यापक जनअभियान भी चला रही हैं।

प्रकृति वंदन अभियान के तहत उन्होंने विद्यालयों, महाविद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 4,000 पौधों का निःशुल्क वितरण किया है। इसके साथ ही महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों, किसानों और युवाओं को देसी बीज संरक्षण, प्राकृतिक खेती, औषधीय पौधों के उत्पादन, फूलों की खेती और स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य किया है।

शहरी क्षेत्रों में आदर्श बागवानी (Urban Model Gardening) को बढ़ावा देने के लिए भी डॉ. साठे ने हजारों लोगों को प्रशिक्षित किया है। आदिवासी समुदाय, महिलाओं और युवाओं के स्किल डेवलपमेंट, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर उनके विशेष कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। वे अरोमा थेरेपी विशेषज्ञ भी हैं और उनके मार्गदर्शन में हजारों महिला समूह फूलों की खेती एवं उससे जुड़े स्वरोजगार के माध्यम से लाभान्वित हो रहे हैं।
डॉ. आरती साठे द्वारा विकसित प्राकृतिक खेती एवं पर्यावरण संरक्षण के सफल मॉडलों को कई विश्वविद्यालयों ने अपनाया है। उनके कार्यों का अध्ययन करने के लिए अमेरिका से वैज्ञानिक एवं कृषि विशेषज्ञ भी भारत आ चुके हैं। वे फ्लोरिडा और कतर में भी फैकल्टी के रूप में अपनी विशेषज्ञता साझा कर चुकी हैं। उनके मॉडल भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा, वैज्ञानिक तथ्यों, खगोलीय घटनाओं और प्रकृति आधारित कृषि सिद्धांतों पर आधारित हैं।
देसी बीज संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के कारण डॉ. आरती साठे का चयन जी-20 जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए भी किया जा चुका है। प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें अनेक राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के सम्मान प्राप्त हुए हैं।
वर्तमान में डॉ. आरती साठे देशभर में वैज्ञानिक एवं वैदिक पद्धति पर आधारित प्राकृतिक एवं जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा सतत विकास से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता और आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं।






