रायपुर। दो दशकों से वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और मानव- वन्यजीव द्वंद्व को कम करने की दिशा में कार्य कर रही नोवा नेचर वेलफेयर को महाराष्ट्र मंडल के गौरव अलकंरण सम्मान से नवाजा। बता दें कि नोवा नेचर वेलफेयर की टीमें शहर में सर्पों को पकड़ने और उन्हें बिना हानि पहुंचाए जंगलों में छोड़ने का कार्य करतीं हैं।
शिक्षा, व्यवहार परिवर्तन और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में 30 वर्षों से 20 हजार से अधिक छात्रों, शिक्षकों को प्रशिक्षित कर चुकी शोभा मोहता और गर्भ संस्कार, पेरेटिंग कोचिंग के जरिए गर्भवती माता को मार्गदर्शन देने के लिए लेखिका और डॉ. मानसी पत्तेवार को महिला सशक्तीकरण, समाजसेवा के लिए सम्मानित किया गया। खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ठ प्रदर्शन के लिए वर्तिका क्षीरसागर और आय़ुष्मान कालेले सम्मानित किए गए। संत ज्ञानेश्वर सभागृह में आयोजित इस गरिमामय आयोजन में प्रतिभाशाली विद्यार्थी सम्मान, डॉ. अंबेडकर स्मृति अस्पताल की सर्वोत्कृष्ठ नर्स का सम्मान भी अश्लेषम, पुणे के सुप्रसिद्ध नाटक ‘जाणता राजा’ में शामिल होने वाले मंडल के कलाकारों, सभासद पाल्य विद्यार्थियों, खेलकूद व अन्य स्पर्धाओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों सहित रविवार को जिन सभासदों का जन्मदिन था, को सम्मानित किया गया।
इस मौके पर मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर ने कहा कि रायपुर जैसे महानगर में अपनी व्यस्त दिनचर्या और कार्यों के बीच समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य महाराष्ट्र मंडल बखूबी कर रहा है। पिछले कुछ समय से जेन-जी, जेन अल्फा जैसे शब्द हमारे जीवन में आए। कुछ दिन पहले दिल्ली में एक प्रदर्शन की रील्स और वीडियो तेजी से वायरल हुए। इसके बाद सभी ने अपना-अपना तर्क किया। आज यहां बड़ी संख्या में युवा मौजूद हैं, आप सोशल प्लेटफार्म में शेयर होने वाले कंटेट की जांच करें, मंथन करें, फिर उस पर कोई निर्णय करें। उन्होंने युवा साथियों से कहा कि हमें खूब ऊंचा उड़ाना है, खूब आगे जाना है। कई बार लगता है कि माता- पिता हमारे मार्ग में बाधा बन रहे है, लेकिन जिस प्रकार पतंग तब तक आसमान में उड़ती है, जब तक वह डोर से बंधी होती है। डोर छूटने के बाद वह जमीन में गिर जाती है। इसी तरह माता-पिता भी हमारे जिंदगी की डोर हैं, आसमान में उड़ना है, तो उनसे जुड़े रहना ही होगा।
विशेष अतिथि की आसंदी से सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. राजेन्द्र लाकपाले ने युवाओं से कहा कि आप नवीन टेक्नोलॉजी को अपनाएं। आज के जनरेशन की यह बड़ी मांग और जरूरत है। परंतु आपकी सफलता में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से माता- पिता, गुरु, मित्र मंडली की भी बड़ी भूमिका हैं। उन्होंने कहा कि आप अपनी तुलना किसी और से न करें। आप अपनी तुलना स्वयं से करें कि कल आप क्या थे और आज क्या हैं। क्या मैं इससे बेहतर कर सकता हूं, यह भावना हमेशा अपने अंदर होनी चाहिए। धीरे-धीरे आप में परिवर्तन आएगा और आप एक बेहतरीन इंसान बनने की तरफ बढ़ेंगे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने मंडल की ओर से सन् 1988-89 में शुरू किए गए इस सम्मान समारोह और उसके उद्देश्य की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि एक समय पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय ने दीक्षांत समारोह बंद कर दिया था। तब महाराष्ट्र मंडल ने बच्चों के सम्मान की परंपरा शुरू की, जो आज तक जारी है। कार्यक्रम का संचालन मंडल सचिव चेतन दंडवते और सहसचिव अजय पोतदार ने किया। आभार प्रदर्शन कार्यकारिणी सदस्य परितोष डोनगांवकर ने किया।






