खेल प्रतिभाओं को तराशने CSR का 50% हिस्सा खेल अधोसंरचना पर खर्च हो : बृजमोहन अग्रवाल

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अहमदाबाद/रायपुर। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के गुजरात अध्ययन दौरे के दौरान अहमदाबाद में आयोजित समीक्षा बैठक में खेलों के विकास, खिलाड़ियों के भविष्य और महिला एवं बाल पोषण से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने खेल प्रतिभाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक उपक्रमों और लीड बैंकों के CSR फंड का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा खेल अधोसंरचना के विकास पर खर्च करने का सुझाव दिया।

बैठक के पहले सत्र में खेलों के विकास पर चर्चा के दौरान अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश खेलों को लेकर बड़े लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने के लिए जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।

आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का विस्तार

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। प्रदेश लंबे समय से हॉकी की नर्सरी के रूप में अपनी पहचान रखता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें देश के 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 3,800 खिलाड़ियों एवं प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के साथ-साथ बड़े राष्ट्रीय खेल आयोजनों को सफलतापूर्वक आयोजित करने की क्षमता को भी दर्शाता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि CSR निधि के माध्यम से स्कूलों और कॉलेजों में खेल मैदान, आधुनिक खेल उपकरण तथा प्रशिक्षण की सुविधाएं विकसित की जाएं। उन्होंने कहा कि खेल नीति का लक्ष्य केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, फिटनेस और खेलों के प्रति रुचि विकसित करने पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।

पदक विजेताओं को मिले रोजगार की गारंटी

सांसद अग्रवाल ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चयनित खिलाड़ियों को सरकारी विभागों के साथ-साथ सार्वजनिक उपक्रमों में भी 100 प्रतिशत रोजगार सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि खिलाड़ियों को खेलों में बेहतर प्रदर्शन के साथ सुरक्षित भविष्य का भरोसा मिलेगा तो अधिक से अधिक युवा खेलों को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

‘खेलो इंडिया’ को स्कूल-कॉलेजों तक पहुंचाने पर जोर

उन्होंने खेलो इंडिया और फिट इंडिया अभियान को जमीनी स्तर तक मजबूत करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि स्कूल और कॉलेज खेल प्रतिभाओं को तैयार करने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए प्रत्येक शिक्षण संस्थान में पर्याप्त खेल मैदान, आवश्यक उपकरण और प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

‘सक्षम आंगनवाड़ी’ और ‘पोषण 2.0’ पर भी उठाई आवाज

बैठक के दूसरे सत्र में ‘सक्षम आंगनवाड़ी एवं मिशन पोषण 2.0’ के देशव्यापी क्रियान्वयन, प्रभाव और आगामी रणनीतियों की समीक्षा की गई। इस दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने महिलाओं और बच्चों में कुपोषण एवं एनीमिया की रोकथाम के प्रयासों में छत्तीसगढ़ के वनांचल, आदिवासी और आकांक्षी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग की अवधि के लिए ₹1,81,703 करोड़ के कुल वित्तीय आवंटन के साथ संचालित मिशन पोषण 2.0 का लाभ देश के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से पहुंचना चाहिए।

बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों पर विशेष फोकस

अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा संभाग सहित दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में कुपोषण और एनीमिया की समस्या से निपटने के लिए जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने पूरक पोषण कार्यक्रम, पोषण ट्रैकर की डिजिटल मॉनिटरिंग और आंगनवाड़ी केंद्रों के आधुनिकीकरण की गति बढ़ाने पर जोर दिया।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कल्याण और प्रशिक्षण पर जोर

बैठक में पोषण ट्रैकर, फेस रिकॉग्निशन सिस्टम और आधार सत्यापन जैसी तकनीकी पहलों की भी समीक्षा की गई। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि देशभर में लाखों आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं जमीनी स्तर पर महिलाओं एवं बच्चों तक पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को समय पर मानदेय, सामाजिक सुरक्षा बीमा तथा डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था को और मजबूत करने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ के तहत केंद्रों को LED स्क्रीन, वाटर प्यूरिफायर, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) सामग्री तथा पोषण वाटिका जैसी सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को इसी आधुनिक मॉडल के अनुरूप विकसित करने से प्रदेश की भावी पीढ़ी के शारीरिक और बौद्धिक विकास को नई दिशा मिल सकती है।

बैठक में समिति अध्यक्ष मुकुल वासनिक सहित समिति के सदस्य एवं केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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