पीवी ऐप की बाध्यता से किसान परेशान एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन नहीं हो रहा – कांग्रेस

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पीवी ऐप की बाध्यता से किसान परेशान एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन नहीं हो रहा - कांग्रेस

रायपुर। भुइयां ऐप को अचानक ब्लॉक कर पीवी (फसल भौतिक सत्यापन) ऐप की बाध्यता थोपने के कारण एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन नहीं हो पा रहा। प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि सरकार के इस तुगलकी फरमान से एग्रीस्टैक पोर्टल में किसानों के पंजीयन की पूरी प्रक्रिया ठप हो गई है। भाजपा सरकार एक तरफ पारदर्शी और सुगम धान खरीदी का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ हर कुछ हफ्तों में नियमों में उलझाऊ बदलाव कर रही है। छत्तीसगढ़ का किसान आज बेहद आक्रोशित और असमंजस में है। धान खरीदी का सीजन आने वाला है, लेकिन साय सरकार रोज नए नियम थोपकर किसानों को परेशान करने में लगी है। पहले संयुक्त खातेदारों में सभी सदस्यों के पंजीयन की अनिवार्य शर्तों का फंदा डाला गया, और अब भुइयां ऐप को ब्लॉक करके पीवी ऐप की ऐसी बाध्यता थोप दी गई है, जिससे पटवारी से लेकर किसान तक सड़कों पर भटक रहे हैं। यह कोई तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि किसानों को पंजीयन से वंचित करने का भाजपाई षड्यंत्र है।

प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि नए पीवी ऐप के संदर्भ में पटवारियों के पास स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं, न ही उन्हें कोई प्रशिक्षण दिया जाए, बिना तैयारी के नया सिस्टम जबरिया थोप दिया गया, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। खरीफ फसलों की गिरदावली का काम बीच रास्ते में अटक गया है।

प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि इसके साथ ही संयुक्त खाते में सभी खातेदारों का पंजीयन अनिवार्य किया गया है। इससे भी लोग परेशान हो रहे है। सरकार की मंशा किसानों को सुविधा देना नहीं, परेशान करना है। संयुक्त खातेदारों के लिए सभी हिस्सेदारों का पंजीयन अनिवार्य करने से पारिवारिक विवाद बढ़ रहे हैं और बुजुर्ग, महिलाएं या बाहर रहने वाले हिस्सेदारों के कारण पूरा परिवार पंजीयन से वंचित हो रहा है।

प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि बार-बार नियम बदलने से छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, निंदाई गुड़ाई का काम छोड़कर किसान मंडियों और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अन्नदाता को नौकरशाही का मोहताज बनाने वाली यह व्यवस्था छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान पर सीधा प्रहार है। भाजपा सरकार डिजिटल इंडिया के नाम पर “डिजिटल नकेबबंदी” करके धान खरीदी के आंकड़े कम करने और सरकारी खजाना बचाने की साजिश कर रही है।

प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि जब धान खरीदी की प्रक्रिया के नीतिगत निर्णय तय है, प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तब अचानक भुइयां ऐप को बंद करके नया ऐप थोपने का औचित्य क्या है? गिरदावली का काम बीच रास्ते में क्यों अटका हुआ है, और क्या सरकार नियत समय पर धान खरीदी शुरू करने की स्थिति में है? संयुक्त खातेदारों में अगर कोई एक सदस्य बाहर है, तो क्या उसके कारण बाकी हिस्सेदार किसानों का धान नहीं खरीदा जाएगा? क्या यह सच नहीं है कि सर्वर डाउन और ऐप के चक्कर में जानबूझकर पंजीयन की रफ्तार धीमी की जा रही है ताकि सरकार को कम धान खरीदना पड़े? पटवारी संघ की व्यावहारिक समस्याओं और असंतोष पर सरकार चुप क्यों है? क्या सरकार अपनी नाकामी का भड़ास कर्मचारियों और किसानों पर निकाल रही है? असलियत यह है कि भाजपा सरकार का डिजिटल इंडिया, छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए ‘डिजिटल डाका’ बन गया है। भुइयां ऐप ब्लॉक कर किसानों को बंधक बना दिया गया है। पारदर्शिता के नाम पर व्यवस्था को ठप करना सरकार की नाकामी है। कांग्रेस की मांग है कि किसानों को बिना किसी प्रशासनिक अड़ंगे के सीधे और सुगम तरीके से उनका अधिकार मिलना चाहिए।

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