ई-वे बिल नियमों में राहत की मांग, कैट ने जीएसटी कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

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ई-वे बिल नियमों में राहत की मांग, कैट ने जीएसटी कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

रायपुर। देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठनों में शामिल कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने छत्तीसगढ़ में व्यापारिक गतिविधियों को सरल, सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए ई-वे बिल नियमों में व्यावहारिक सुधार किए जाने की मांग की है। कैट ने एक ही जिले के भीतर, विशेषकर एक ही शहर या नगर में होने वाले माल परिवहन को निर्धारित शर्तों के तहत ई-वे बिल से छूट देने तथा आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए सरल व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया है।

कैट के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन जितेन्द्र दोशी, विक्रम सिंहदेव, प्रदेश अध्यक्ष श्री परमानंद जैन, वाइस चेयरमेन सुरिन्दर सिंह, जीवत बजाज, प्रदेश महामंत्री श्री अवनीत सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री विजय पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष श्री राजेन्द्र जग्गी, वासु माखीजा, राम मंधान, भरत जैन, राकेश ओचवानी एवं शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से यह जानकारी दी।

कैट के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन श्री अमर पारवानी ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार व्यापार को प्रोत्साहित करने और ईज ऑफ डुइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है। इसी दिशा में ई-वे बिल व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक एवं व्यापार-अनुकूल बनाना महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि अनावश्यक प्रक्रियागत जटिलताओं को कम करने और कर अनुपालन को सरल बनाने से प्रदेश में व्यापार, उद्योग एवं आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

स्थानीय परिवहन को ई-वे बिल से छूट देने का सुझाव
कैट ने सुझाव दिया है कि एक ही जिले के भीतर, विशेषकर एक ही शहर अथवा नगर में होने वाले माल के परिवहन को निर्धारित शर्तों के अंतर्गत ई-वे बिल से पूर्ण छूट देने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर माल की आपूर्ति करने वाले छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को राहत मिलेगी। साथ ही दस्तावेजी औपचारिकताओं में कमी आने से व्यापारिक कार्यों में तेजी आएगी और समय की बचत होगी।

आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए सरल व्यवस्था की मांग
कैट ने दवाइयों एवं चिकित्सा उपकरणों, कृषि उपकरणों एवं कृषि निवेश सामग्री, ताजे फल-सब्जियों, दूध एवं दुग्ध उत्पादों, खाद्य पदार्थों, पुस्तकों, नोटबुक तथा शैक्षणिक सामग्री जैसी आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए राज्य के भीतर उपयुक्त एवं न्यूनतम प्रतिबंधों वाली व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया है।

संगठन का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से व्यापारियों को सुविधा मिलने के साथ आम नागरिकों, किसानों, विद्यार्थियों एवं अन्य उपभोक्ताओं तक आवश्यक वस्तुओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इससे आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी और व्यापारिक गतिविधियां अधिक प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगी।

व्यापारिक सुविधा के साथ कर अनुपालन भी जरूरी
अमर पारवानी ने कहा कि व्यापार और शासन एक-दूसरे के पूरक हैं। व्यापारियों को सरल प्रक्रियाएं उपलब्ध कराना तथा शासन के राजस्व और कर अनुपालन संबंधी उद्देश्यों को सुरक्षित रखना, दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। ई-वे बिल व्यवस्था में ऐसे व्यावहारिक सुधार किए जाने चाहिए, जिनसे व्यापारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े और कर व्यवस्था की पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता भी बनी रहे।

उन्होंने कहा कि नियमों का उद्देश्य व्यापार को सुचारू बनाना, कर अनुपालन को प्रोत्साहित करना और आर्थिक गतिविधियों को गति देना होना चाहिए। स्थानीय परिवहन एवं आवश्यक वस्तुओं के लिए व्यावहारिक राहत मिलने से छोटे व्यापारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी तथा प्रदेश के व्यापारिक वातावरण में सकारात्मक बदलाव आएगा।

जीएसटी आयुक्त से सुधारों पर विचार करने का आग्रह
कैट ने जीएसटी आयुक्त से व्यापारिक संगठनों के सुझावों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए ई-वे बिल नियमों में आवश्यक सुधारों पर विचार करने का आग्रह किया है। संगठन ने विश्वास व्यक्त किया कि शासन और व्यापारिक समुदाय के बीच निरंतर संवाद एवं सहयोग से ऐसी व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जो व्यापारियों के लिए सुविधाजनक, उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी तथा शासन के लिए राजस्व एवं कर अनुपालन की दृष्टि से प्रभावी हो।

कैट के प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन ने कहा कि संगठन का उद्देश्य शासन और व्यापारियों के बीच संवाद एवं सहयोग को मजबूत करना तथा छत्तीसगढ़ को व्यापार एवं उद्योग के लिए अधिक सुगम, पारदर्शी और अनुकूल प्रदेश बनाने की दिशा में रचनात्मक योगदान देना है।

इस अवसर पर कैट के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन अमर पारवानी, जीवत बजाज, अवनीत सिंह भाटिया, विजय पटेल, राम मंधान, भरत जैन, राकेश ओचवानी, शंकर बजाज, दीपक विधानी, कन्हैया गुप्ता, कांति पटेल, रतन सिंह सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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