रायपुर। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के छत्तीसगढ़ चैप्टर ने जीएसटी शिकायत निवारण समिति (जीआरसी) की बैठक में प्रदेश के व्यापारियों से जुड़ी जीएसटी संबंधी विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और व्यापारियों के अनुकूल बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। अटल नगर, नवा रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित बैठक में कैट के प्रतिनिधिमंडल ने व्यापारियों की व्यावहारिक कठिनाइयों के समाधान और अनुपालन प्रक्रिया में सुधार पर जोर दिया।
कैट के नेशनल वाइस चेयरमैन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य अमर पारवानी सहित छत्तीसगढ़ चैप्टर के पदाधिकारियों ने कहा कि जीएसटी का उद्देश्य सरल, पारदर्शी और प्रभावी कर व्यवस्था स्थापित करना है। ऐसे में व्यापारियों के व्यावहारिक अनुभवों को ध्यान में रखते हुए नियमों और प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए। इससे व्यापारियों को राहत मिलने के साथ कर अनुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा और शासन तथा व्यापार जगत के बीच विश्वास मजबूत होगा।
पुराने मामलों में राहत और आईटीसी नियमों की समीक्षा की मांग
बैठक में कैट ने पुराने लंबित जीएसटी रिटर्न, विलंब शुल्क और जुर्माने से जुड़े मामलों में राहत देने के लिए एमनेस्टी योजना लागू करने अथवा विशेष अवसर प्रदान करने का सुझाव दिया। निर्धारित समय-सीमा के कारण अपील नहीं कर पाने वाले करदाताओं को भी राहत देने की आवश्यकता बताई गई।
इसके अलावा, वास्तविक कारोबारी लेन-देन के बावजूद तकनीकी या आपूर्तिकर्ता से संबंधित कारणों से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) प्राप्त करने में आने वाली समस्याओं को दूर करने तथा जीएसटीआर-2बी आधारित प्रतिबंधों की समीक्षा करने का सुझाव रखा गया।
कैट ने कहा कि ईमानदार करदाताओं से अनजाने में हुई त्रुटियों के मामलों में दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सुधार और अनुपालन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। छोटे व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से राहत देने के लिए जीएसटी अनुपालन रेटिंग को प्रभावी बनाने की जरूरत भी बताई गई।
कंपोजिशन योजना, ई-इनवॉइस और रिटर्न संशोधन पर सुझाव
कैट ने छोटे कारोबारियों की सुविधा के लिए कंपोजिशन योजना की कारोबार सीमा बढ़ाने तथा सेवा प्रदाताओं के लिए पंजीकरण की सीमा में उपयुक्त वृद्धि करने का सुझाव दिया। ई-इनवॉइस से जुड़े मामलों में खरीदार को आईटीसी का लाभ मिलने की प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाने और ई-वे बिल के कारण माल परिवहन के दौरान निर्दोष व्यापारियों को होने वाली परेशानियों से बचाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी उठाई गई।
प्रतिनिधिमंडल ने जीएसटीआर-9 में वास्तविक त्रुटियों को सुधारने, छूटे हुए आईटीसी दावों के लिए उचित अवसर देने तथा जीएसटीआर-3बी में आवश्यक संशोधन की सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। इसके साथ ही नियम 86बी के तहत आईटीसी के उपयोग पर लगाए गए प्रतिबंध की समीक्षा, एचएसएन कोड संबंधी आवश्यकताओं में एकरूपता और गैर-जीएसटी खर्चों के विवरण से जुड़े अनावश्यक अनुपालन भार को कम करने की आवश्यकता पर भी ध्यान आकर्षित किया गया।
कैट ने स्पष्ट किया कि इन सुझावों का उद्देश्य कर दायित्वों से बचने की छूट मांगना नहीं, बल्कि वास्तविक करदाताओं को प्रक्रियागत कठिनाइयों से राहत दिलाना, अनावश्यक विवादों को कम करना और कर व्यवस्था में विश्वास बढ़ाना है।
व्यापारियों की समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा
बैठक में कैट के प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन के नेतृत्व में सीए मुकेश मोटवानी, सीए किशोर बरड़िया, विजय गोयल, दीपक विधानी, कन्हैया गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। कैट के पदाधिकारियों ने व्यापारियों से जुड़े विभिन्न जीएसटी मुद्दों को अधिकारियों के समक्ष रखते हुए उनके व्यावहारिक समाधान की आवश्यकता बताई।
कैट के पदाधिकारियों अमर पारवानी, जितेन्द्र दोशी, विक्रम सिंहदेव, परमानंद जैन, सुरिन्दर सिंह, जीवत बजाज, अवनीत सिंह, विजय पटेल, राजेन्द्र जग्गी, वासु माखीजा, राम मंधान, भरत जैन, राकेश ओचवानी और शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से कहा कि शासन और व्यापारिक संगठनों के बीच नियमित संवाद से व्यापारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव है। इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी और व्यापारी स्वेच्छा से कर अनुपालन के लिए प्रोत्साहित होंगे।
वरिष्ठ कर अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में मुख्य आयुक्त मानस आर. मोहंती, प्रधान आयुक्त पराग सी. बोरकर, राज्य कर आयुक्त पुष्पेंद्र के. मीणा, विशेष आयुक्त तरन्नुम वर्मा, संयुक्त आयुक्त अमित चंदेल, अरविंद कुमार, सोनल के. मिश्रा एवं भावना अली, अपर आयुक्त योगेश यादव तथा उपायुक्त पिंकी बास्के, नितिन गर्ग और प्रतिष्ठा ठाकुर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
कैट छत्तीसगढ़ ने आशा व्यक्त की कि बैठक में प्रस्तुत सुझावों पर संबंधित स्तर पर सकारात्मक विचार-विमर्श होगा और व्यापारियों के हितों तथा शासन के राजस्व हितों के बीच संतुलन बनाते हुए आवश्यक सुधार किए जाएंगे। संगठन ने दोहराया कि जीएसटी व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने तथा व्यापारियों की समस्याओं को शासन के समक्ष रचनात्मक ढंग से रखने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।






