सूरजपुर/कुबेरपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के ग्राम कुबेरपुर में सड़क हादसे में महिला चंद्रावती जायसवाल की मौत और इसके बाद उपजे तनाव के मामले में कैबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक लक्ष्मी राजवाड़े ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने शोकाकुल परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें न्याय दिलाने और हरसंभव मदद का भरोसा दिया। इस दौरान उन्होंने पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए एकतरफा कार्रवाई और कथित प्रशासनिक लापरवाही पर तीखे सवाल उठाए।
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सड़क हादसे में महिला की असमय मौत बेहद दुखद है। उन्होंने घटना के लिए जिम्मेदार ट्रैक्टर चालक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
पुलिस और ग्रामीणों को आमने-सामने बैठाकर सुनी शिकायतें
गांव पहुंचने के बाद मंत्री ने पुलिस अधिकारियों और ग्रामीणों को आमने-सामने बैठाकर घटनाक्रम की जानकारी ली। इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर निर्दोष लोगों को पकड़ने, घरों से उठाने और एकतरफा कार्रवाई करने के आरोप लगाए। ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद मंत्री ने पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जताई और अधिकारियों से कार्रवाई में निष्पक्षता बरतने को कहा।
ट्रैक्टर मालिक और अवैध परिवहन की जांच पर जोर
ग्रामीणों ने मंत्री को बताया कि हादसे में शामिल गिट्टी लोड ट्रैक्टर कथित तौर पर अवैध गतिविधियों में संलिप्त था, लेकिन ट्रैक्टर मालिक और परिवहन से संबंधित कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं।
इस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने पुलिस अधिकारियों से सवाल किया कि आगजनी की घटना में शामिल ग्रामीणों की पहचान और गिरफ्तारी में तत्परता दिखाई गई, लेकिन ट्रैक्टर के दस्तावेज, क्रशर संचालन और गिट्टी परिवहन की वैधता की जांच क्यों नहीं की गई।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ट्रैक्टर के दस्तावेजों, क्रशर संचालन और परिवहन संबंधी नियमों की गहन जांच की जाए। यदि अवैध गतिविधियां पाई जाती हैं, तो ट्रैक्टर मालिक सहित संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विधिसम्मत कड़ी कार्रवाई की जाए।
हादसे और आगजनी के बीच प्रशासन की भूमिका पर सवाल
मंत्री ने हादसे के समय और उसके बाद हुई आगजनी की घटना के बीच प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हादसा दोपहर करीब 12 बजे हुआ, जबकि तनाव और आगजनी की घटना शाम 6 से 7 बजे के आसपास हुई। ऐसे में पांच से छह घंटे के दौरान स्थिति को संभालने और ग्रामीणों से संवाद स्थापित करने के लिए क्या कदम उठाए गए, इसका जवाब अधिकारियों को देना चाहिए।
उन्होंने समय रहते प्रभावी संवाद और उचित कार्रवाई नहीं होने को प्रशासनिक विफलता बताते हुए अधिकारियों को भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए गंभीरता बरतने की हिदायत दी।
निर्दोष ग्रामीणों की रिहाई और हिरासत में मारपीट पर सख्त निर्देश
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन ग्रामीणों के खिलाफ उपद्रव या आगजनी में शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, उनके विरुद्ध बिना ठोस आधार कार्रवाई नहीं की जाए। उन्होंने ऐसे मामलों में कानून के अनुसार उचित समीक्षा कर निर्दोष व्यक्तियों को तत्काल रिहा करने की बात कही।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस हिरासत में किसी भी व्यक्ति के साथ मारपीट या अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही निर्दोष ग्रामीणों को परेशान करने और पूरे गांव में भय का माहौल बनाने से बचने के निर्देश दिए।
बोलीं मंत्री—जनता के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि क्षेत्र की जनता उनका परिवार है और किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले में निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए वह ग्रामीणों के साथ खड़ी रहेंगी।
कुबेरपुर की घटना के बाद अब पुलिस-प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ आगजनी के मामले में निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।






