रायपुर। कंपनियों के अधिकृत अधिकारियों की फर्जी व्हाट्सएप पहचान बनाकर एकाउंटेंट को करोड़ों रुपये ट्रांसफर करने का निर्देश देने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का रायपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह ने दो अलग-अलग कंपनियों को निशाना बनाकर कुल 2 करोड़ 93 लाख रुपये की ठगी की थी। पुलिस ने मामले में महाराष्ट्र के ठाणे जिले के उल्हासनगर से तीन और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से ठगी की रकम में से कुल 1 करोड़ 38 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में होल्ड कराए गए हैं।
यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला, पुलिस उपायुक्त (पश्चिम जोन) रॉबिन्सन गुरिया और पुलिस उपायुक्त (उत्तर जोन) तारकेश्वर पटेल की मॉनिटरिंग में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट, थाना टिकरापारा और थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम ने की।
एक ही तरीके से दो कंपनियों को बनाया निशाना
पुलिस के मुताबिक, टिकरापारा थाना क्षेत्र में राठी बंधुस कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विजय राठी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 19 से 21 अक्टूबर 2026 के बीच अज्ञात व्यक्ति ने उनके नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल कर कंपनी के एकाउंटेंट लेखराम चक्रधारी को व्हाट्सएप संदेश भेजे। संदेश में बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए थे। इसे वास्तविक समझकर एकाउंटेंट ने कंपनी के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के खाते से 93 लाख रुपये बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। इस मामले में टिकरापारा थाने में अपराध क्रमांक 984/26 के तहत धारा 318(4) बीएनएस और 66डी आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया।
इसी तरह तेलीबांधा थाना क्षेत्र में ट्रांसफॉर्मर एंड ट्रांसमिशन लिमिटेड कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी ओमकार वरु ने शिकायत दर्ज कराई थी। अज्ञात व्यक्ति ने कंपनी के अधिकृत व्यक्ति अंशुल शर्मा के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर एकाउंटेंट बिरेश तिवारी को व्हाट्सएप संदेश भेजा और टी-के कंस्ट्रक्शन के बैंक खाते में दो करोड़ रुपये ट्रांसफर करने को कहा। निर्देश को वास्तविक समझकर एकाउंटेंट ने बैंक ऑफ बड़ौदा की पंडरी शाखा स्थित कंपनी के खाते से दो करोड़ रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। इस मामले में तेलीबांधा थाने में अपराध क्रमांक 458/26 के तहत धारा 318(4) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज किया गया।
मोबाइल और बैंक खातों के विश्लेषण से मिला सुराग
दोनों घटनाओं में वारदात का तरीका एक जैसा होने पर पुलिस ने संयुक्त जांच शुरू की। कंपनी के अधिकारियों और एकाउंटेंट से पूछताछ के साथ ही आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप प्रोफाइल और बैंक खातों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। ठगी की रकम जिन खातों में भेजी गई थी, उनसे जुड़े अन्य बैंक खातों की भी जांच की गई। डिजिटल साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की।
जांच में टिकरापारा के मामले के आरोपियों का लोकेशन महाराष्ट्र के ठाणे जिले के उल्हासनगर और तेलीबांधा के मामले के आरोपियों का लोकेशन प्रयागराज में मिला। इसके बाद पुलिस की अलग-अलग टीमें दोनों राज्यों में रवाना की गईं।
उल्हासनगर से तीन और प्रयागराज से दो गिरफ्तार
टिकरापारा थाना पुलिस की टीम ने महाराष्ट्र के उल्हासनगर में दबिश देकर आकाश कन्हैया लाल चुथ (20), साहिल रमेश नथानी (23) और राज चन्दर लाल जुमानी (23) को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने फर्जी पहचान और व्हाट्सएप प्रोफाइल का इस्तेमाल कर साइबर ठगी करना स्वीकार किया। इनके कब्जे से 25 हजार रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, तीन एटीएम कार्ड और तीन पासबुक जब्त की गई हैं।
वहीं, तेलीबांधा थाना क्षेत्र के दो करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने प्रयागराज से विनय श्रीवास्तव (47) और विनोद कुमार (49) को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। दोनों आरोपियों को प्रयागराज न्यायालय से जमानत पर रिहा किया गया है। पुलिस उन्हें आगे की विवेचना के लिए रायपुर लाने की प्रक्रिया कर रही है। इसके अलावा एक अन्य आरोपी को रायपुर में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
टिकरापारा के आरोपियों की तेलीबांधा केस में भी संलिप्तता
जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि टिकरापारा थाना क्षेत्र के 93 लाख रुपये की ठगी के मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों की तेलीबांधा थाना क्षेत्र में हुई दो करोड़ रुपये की ठगी में भी संलिप्तता उजागर हुई है। पुलिस दोनों मामलों के बीच आरोपियों के आपसी संपर्क और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
1.38 करोड़ रुपये कराए गए होल्ड
पुलिस ने बैंक अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर दोनों मामलों में कुल 1 करोड़ 38 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में होल्ड कराए हैं। इसमें टिकरापारा के मामले में 24 लाख रुपये और तेलीबांधा के मामले में 1 करोड़ 14 लाख रुपये शामिल हैं।
पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और जब्त मोबाइल फोन की तकनीकी जांच के जरिए गिरोह के अन्य सदस्यों, साइबर ठगी के नेटवर्क तथा रकम के लेन-देन से जुड़े दूसरे बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।






