अडानी को फिर सौंपा जा रहा जल, जंगल और जमीन, सूरजपुर में 4800 मेगावाट के पावर प्लांट को पर्यावरण स्वीकृति देने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल : दीपक बैज

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अडानी को फिर सौंपा जा रहा जल, जंगल और जमीन, सूरजपुर में 4800 मेगावाट के पावर प्लांट को पर्यावरण स्वीकृति देने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल : दीपक बैज

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सूरजपुर जिले में अडानी समूह के प्रस्तावित 4800 मेगावाट के सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट को पर्यावरण स्वीकृति दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक बार फिर प्रदेश का जल, जंगल और जमीन अडानी को सौंपने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने डीएड अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई और पटवारियों की हड़ताल को लेकर भी राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।

बैज ने कहा कि सूरजपुर जिले में प्रस्तावित यह कोयला आधारित पावर प्लांट बड़े पैमाने पर वन भूमि को प्रभावित करेगा। कंपनी के पास वर्तमान में केवल 465.92 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है, जबकि परियोजना के लिए 673.5 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई है। इस प्रकार 207.58 हेक्टेयर भूमि की कमी है, जो वन भूमि बताई जा रही है। इसके बावजूद कंपनी ने वन भूमि डायवर्सन के लिए आवेदन तक नहीं किया है और सरकार ने पर्यावरण स्वीकृति दे दी।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित परियोजना गुम्गा, चिरवान और मुड़गांव जैसे संरक्षित वनों तथा सलका और नारायणपुर गांवों के नजदीक स्थित है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी परियोजना स्थल से महज 150 से 250 मीटर की दूरी पर है। ऐसे में वन, पर्यावरण और स्थानीय आबादी पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।

दीपक बैज ने परियोजना की जल आवश्यकता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पावर प्लांट के संचालन के लिए प्रतिवर्ष लगभग 84 मिलियन घनमीटर पानी की जरूरत होगी। लेकिन यह पानी कहां से आएगा, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। उनके अनुसार, इस परियोजना को पानी हसदेव-बांगो जलाशय से उपलब्ध कराए जाने की संभावना है, जबकि यह जलाशय क्षेत्र की सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। यदि यहां से उद्योग को पानी दिया जाएगा तो किसानों की सिंचाई और कृषि पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

उन्होंने कहा कि वन भूमि के उपयोग, ग्रामसभा की सहमति, वन भूमि डायवर्सन के आवेदन और परियोजना के लिए पानी की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को स्पष्ट किए बिना पर्यावरण स्वीकृति कैसे दी गई? कांग्रेस इस परियोजना के लिए वन भूमि के उपयोग और हसदेव-बांगो जलाशय का पानी दिए जाने के प्रस्ताव का विरोध करती है।

डीएड अभ्यर्थियों के साथ बर्बरता निंदनीय : बैज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने डीएड अभ्यर्थियों के आंदोलन पर कार्रवाई को निंदनीय बताते हुए कहा कि लगभग 2300 डीएड अभ्यर्थी पिछले 321 दिनों से अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मांगें जायज हैं और न्यायालय के आदेश के अनुसार उनकी सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति होनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर शिक्षामंत्री के निवास पर सपरिवार पहुंचे थे, लेकिन सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनके साथ मारपीट की और उन्हें वहां से बर्बरतापूर्वक हटाया। बैज ने आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगार अभ्यर्थियों की मांगों पर निर्णय लेने के बजाय उनके साथ दमनात्मक व्यवहार कर रही है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार का यह रवैया उसके सुशासन के दावों पर सवाल खड़े करता है।

पटवारियों की हड़ताल खत्म कराने के बजाय सरकार कर रही निलंबन : बैज
दीपक बैज ने प्रदेश में जारी पटवारियों की हड़ताल को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पटवारियों की जायज मांगों पर बातचीत कर समाधान निकालने के बजाय उन्हें निलंबित कर रही है। सैकड़ों पटवारियों को निलंबित किया जा चुका है तथा ड्यूटी पर वापस नहीं लौटने की स्थिति में सर्विस ब्रेक की धमकी दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर कार्रवाई करना सरकार की कार्यशैली को दर्शाता है। पटवारियों की हड़ताल के कारण धान खरीदी की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। किसानों का पंजीयन नहीं हो पा रहा है और खसरा-खतौनी में सुधार का काम भी अटका हुआ है।

बैज ने कहा कि पटवारी राजस्व विभाग द्वारा लागू किए गए नए पीवी ऐप (फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप) का विरोध कर रहे हैं। इस ऐप के माध्यम से डिजिटल सर्वे और जीपीएस फोटो अपलोड करना अनिवार्य किया गया है, लेकिन इसमें लगातार तकनीकी समस्याएं आ रही हैं। सर्वर डाउन रहने, लोकेशन मैच नहीं होने और खेतों में खड़ी फसलों के भौतिक सत्यापन में व्यावहारिक दिक्कतों के कारण पटवारी परेशान हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर पटवारियों की हड़ताल समाप्त कराने के लिए गंभीर प्रयास नहीं कर रही है। इससे धान खरीदी प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पटवारियों की हड़ताल जारी रहती है तो किसानों का धान समय पर कैसे खरीदा जाएगा?

बैज ने राज्य सरकार से मांग की कि सूरजपुर में प्रस्तावित पावर प्लांट की पर्यावरण स्वीकृति से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए, डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर शीघ्र निर्णय लिया जाए तथा पटवारियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए।

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