मूक-बधिर बच्चों के लिए शासकीय स्तर पर स्पीच थेरेपी प्रारंभ करने पूर्व विधायक ने कलेक्टर को लिखा पत्र

0
5

मूक-बधिर बच्चों के लिए शासकीय स्तर पर स्पीच थेरेपी प्रारंभ करने पूर्व विधायक ने कलेक्टर को लिखा पत्र

महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चन्द्राकर ने कलेक्टर महासमुंद को पत्र प्रेषित कर जिले में मूक-बधिर बच्चों के लिए शासकीय स्तर पर स्पीच थेरेपी प्रारंभ करने की मांग की है।

अपने पत्र में श्री चन्द्राकर ने उल्लेख किया है कि जिले में पंजीकृत एवं अपंजीकृत बड़ी संख्या में मूक-बधिर बच्चे निवासरत हैं, जिनमें अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। ऐसे बच्चों के सर्वांगीण विकास, संवाद क्षमता में सुधार तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्पीच थेरेपी अत्यंत आवश्यक है, किंतु वर्तमान में जिले में यह सुविधा शासकीय स्तर पर उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने बताया कि समाज कल्याण विभाग द्वारा ग्राम खैरा स्थित बहुविकलांग भवन में पहले से ही दिव्यांग बच्चों के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। यदि इसी भवन में स्पीच थेरेपी की सुविधा प्रारंभ कर दी जाए तो उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा तथा जरूरतमंद बच्चों को उनके घर के निकट ही उपचार उपलब्ध हो सकेगा।

श्री चन्द्राकर ने सुझाव दिया कि इस कार्य के लिए समाज कल्याण विभाग की निराश्रित निधि अथवा मंडी शुल्क से प्राप्त राशि का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी इसी निधि से बहुविकलांग भवन का निर्माण एवं संचालन किया गया है, इसलिए इस निधि का उपयोग स्पीच थेरेपी जैसी आवश्यक सेवा प्रारंभ करने में भी किया जाना चाहिए।

उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में एक निजी संस्था द्वारा बिना पंजीयन के स्पीच थेरेपी कराई जा रही है, जिसके लिए प्रतिदिन लगभग ₹500 का शुल्क लिया जाता है। लंबे समय तक चलने वाली इस थेरेपी का खर्च गरीब परिवार वहन करने में असमर्थ हैं, जिसके कारण अनेक बच्चे आवश्यक उपचार से वंचित रह जाते हैं।

पूर्व विधायक ने कहा कि यदि शीघ्र पहल नहीं की गई तो जिले के सैकड़ों मूक-बधिर बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कलेक्टर से आग्रह किया है कि समाज कल्याण विभाग अथवा जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से स्पीच थेरेपी की सुविधा तत्काल प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की जाए, ताकि जिले के गरीब एवं जरूरतमंद मूक-बधिर बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सके और वे आत्मनिर्भर एवं सम्मानजनक जीवन जीने में सक्षम बन सकें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here