मोदी सरकार में जारी है बैंक लूट, एनपीए के नाम पर पूंजीपतियों के लाखों करोड़ राइट ऑफ – सुरेंद्र वर्मा

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ट्रिपल इंजन सरकार के संरक्षण में ही पूरे प्रदेश में ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टे का नेटवर्क फल-फूल रहा है - कांग्रेस 

रायपुर। केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा पब्लिक सेक्टर बैंकों के एनपीए न्यूनतम होने के दावे पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता  ने कहा है कि जिन कॉर्पाेरेट परस्त नीतियों के लिए मोदी सरकार को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए उसे यह सरकार अपनी उपलब्धि बता रही है। मोदी सरकार ने पिछले एक दशक में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने लगभग 16 लाख 11 हजार करोड़ से अधिक के एनपीए को बट्टे खाते (राइट ऑफ) में डाला है, ये कर्ज किसी गरीब या किसानों के नहीं बल्कि भाजपा के चहेते चंद बड़े उद्योगों और कॉर्पाेरेट का है। सरकार का यह कुतर्क है कि इस वित्तीय सफाई और तथाकथित सुधारों के कारण बैंकों की सेहत में सुधार हुआ है, जिससे ग्रॉस एनपीए अनुपात घटकर बहु-दशकीय निचले स्तर पर आ गया है और सरकारी बैंक फिर से मुनाफे में आए हैं। मतलब साफ़ है पूंजीपति मुनाफे में हैं, बैंक मुनाफा कमा रहे हैं, पब्लिक सेक्टर बैंकों की केवल इस साल की कमाई 1 लाख 98 हजार करोड़ है, लेकिन इन दोनों के दुर्भावना और षड़यंत्रों की कीमत आम आदमी चुका रहा है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सत्ता के संरक्षण में पिछले दस वर्षों से, जालसाजों और कॉरपोरेट जगत के शातिर लोगों ने हमारे बैंकिंग सिस्टम द्वारा बट्टे खाते में 16.11 लाख करोड़ रुपये डाले गए, विशाल बैंक डकैती अब भी अनवरत जारी है, मोदी सरकार में विशाल बैंक डकैती आज भी अनवरत जारी है, मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र की यूपीए सरकार ने 2008 में किसानों का 60 हजार करोड़ का कृषि ऋण माफ किया था, भाजपा की सरकार पूंजीपतियों का लोन राइट ऑफ करती है, यह अंतर है नीति और नीयत का। एक तरफ शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, सामाजिक न्याय, खाद सब्सिडी, खाद्य सब्सिडी, मनरेगा के बजट में लगातार कटौती की जा रही है वहीं सभी राहत, रियायत, सब्सिडी और कर्ज माफी केवल भाजपाइयों के पूंजीपति मित्रों के लिए है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि एक तरफ बैंकिंग संस्थाएं न्यूनतम बैलेंस पेनल्टी, डिजिटल सेवा, मैसेज, खुद के खाते से खुद के पैसे के नगद आहरण का भी शुल्क बैंक वसूल रही है, चेक बुक तक का चार्ज लिया जा रहा है, ऐसे दर्जनों शुल्क लगाकर आम ग्राहकों से हजारों करोड़ वसूल रही है, नए नए चार्ज लगाएं जा रहे हैं, आम बैंकिंग उपभोक्ताओं को निचोड़ा जा रहा है वहीं बड़े बकायादारों के लाखों करोड़ के लोन राइट ऑफ किया जा रहा है। भाजपा सरकार की नीतियां गरीब विरोधी है, किसान विरोधी है, जन विरोधी है।

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