स्कूल की रसोई : लकड़ी के धुएं में घुट रहा महिलाओं का स्वास्थ्य, गैस चूल्हे की जगह आज भी लकड़ी का सहारा

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देवभोग (गरियाबंद)। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का उद्देश्य महिलाओं को पारंपरिक चूल्हे के धुएं से राहत दिलाकर स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना है। छत्तीसगढ़ में भी योजना के तहत महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन और चूल्हा उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके बावजूद ग्रामीण अंचलों के कुछ स्कूलों की रसोई में आज भी लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइया महिलाओं को धुएं के बीच घंटों काम करना पड़ रहा है।

स्कूलों में बच्चों को गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए रसोई में रोजाना खाना तैयार किया जाता है। लेकिन जहां गैस की सुविधा उपलब्ध नहीं है अथवा नियमित रूप से गैस का उपयोग नहीं हो रहा, वहां लकड़ी जलाकर भोजन पकाने की मजबूरी बनी हुई है। लकड़ी जलने से निकलने वाला धुआं रसोई के अंदर जमा हो जाता है। इससे काम करने वाली महिलाओं को आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

स्थानीय स्तर पर रसोइया महिलाओं का कहना है कि लकड़ी से खाना पकाने में अधिक समय और मेहनत लगती है। बारिश के मौसम में गीली लकड़ी के कारण परेशानी और बढ़ जाती है। चूल्हे को जलाए रखने के लिए बार-बार लकड़ी डालनी पड़ती है और रसोई में धुआं भरने से काम करना मुश्किल हो जाता है देवभोग मुख्यालय के स्कूल मूँगझर धूपकोट उसरीपानी सरगीबहेली दाबारीभांटा साहसखोल खुटगांव नागलदेही गोहरापदर दरलीपारा लियाहारीपारा सुकलीभांटा पुराना गोहेकेला खोकसरा मोटरापारा जैसे 141 प्राथमिक और 57 माध्यमिक शाला में बच्चो के लिए हर दिन भोजन तैयार करने वाली 390 से अधिक महिलाएं आज भी लकड़ी के चूल्हे से निकलने वाले धुएं के बीच खाना पकाने को मजबूर हैं।इनमें से कुछ स्कूलों के किचन शेड तो ऐसे हैं जहां धुआ का बाहर निकलना काफ़ी मुश्किल होता हैं ऐसे में हर स्कूल के माध्यम भोजन पकाने वाली 2 से 3 महिलाओ के साँसो में वही धुआं रोज उतरता है,जंगलों के आस पास के स्कूलों में मध्यान भोजन पकाने वाले तो किसी तरह लकड़ी जुगाड़ कर रहे है लेकिन नगरीय क्षेत्र में समूह को लकड़ी खरीदना पड़ता हैं जानकारी अनुसार पूरे ब्लॉक में 142 प्राथमिक शालाएं हैं। इनमें केवल एक स्कूल में शिक्षक द्वारा मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था संभाली है, जबकि बाकी स्कूलों में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से बच्चों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है। वहीं 57 मिडिल स्कूलों में भी महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं ही मध्यान्ह भोजन पकाकर बच्चों को परोस रही हैं। लेकिन धुएं में घुटने महिलाएं को आज तक किसी प्रकार राहत नही मिल पाया स्थानीय अधिकारी जानकारी जिला भेजने की बात कहते जिला अधिकारी शासन को प्रेषित करने की बात कहते पल्ला झाड़ लेते हैं जबकि कई माध्यम भोजन पकाने वाली महिला स्वसहायता समूह ने लकड़ी जलाने से निकलने वाला धुआं आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से विभागीय अधिकारी के साथ जनप्रतिनिधि को अवगत करने की बात कह रहे हैं।

प्रति बच्चे पर 6 रुपए 78 पैसा कम दर्ज संख्या स्कूल में संकट

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा प्रति बच्चे ₹6.78 की राशि आवंटित करती है। इसी राशि में दाल, सब्जी, आलू, चना, तेल, हल्दी, मिर्च, मसाले, पापड़ सहित भोजन तैयार करने के लिए लगने वाले गैस अथवा लकड़ी के ईंधन का खर्च भी शामिल है।ऐसे में देवभोग ब्लॉक के सोनामुंदी, कुरलापारा, करलाकोट, धौराझोला, देवभोग प्राथमिक शाला सहित अन्य कम दर्ज संख्या वाले स्कूलों में गैस सिलेंडर से मध्यान्ह भोजन पकाना लगभग नामुमकिन माना जाता है हालांकि 60 से अधिक बच्चों वाले सीनापाली, झाखरपारा, खुटगांव, गोहरापदर, गिरसुल, गाडाघाट, मौखागुड़ा, रोहनागुड़ा सहित कई स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की राशि तुलनात्मक रूप से अधिक होती है।इसलिए उक्त स्कूलों में मध्यान भोजन संचालन में थोड़ी बहुत आर्थिक राहत मिलती है लेकिन महंगाई के इस दौर में उन स्कूल पर भी लकड़ी चूल्हा से भोजन बनाते है जिसका एक कारण गैस सिलेंडर चूल्हा नहीं मिलने को भी मानते हैं स्वसहायता समूहों के महिलाओं का कहना है लंबी समय से मांग रही कि स्कूल में भी गैस सिलेंडर चूल्हा दिया जाए स्थानीय तौर पर कागजी पहल भी होती है लेकिन शासन स्तर से कोई कार्यवाही अब तक नहीं किया है हालांकि बढ़ते गैस के दाम के बीच गैस सिलेंडर से खाना पकाना मुश्किल है।

ब्लॉक से काग़ज़ी कार्यवाही

विभागीय अधिकारी के अनुसार स्कूलों की रसोई को गैस चूल्हे से जोड़ने की कवायद कुछ महीने पहले शुरू हुई थी। इस दौरान तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर ब्लॉक स्तर से स्कूलों को पत्र जारी कर गैस सिलेंडर एवं चूल्हे से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। निर्देश मिलने के बाद ब्लॉक स्तर के अधिकारियों ने स्कूलवार जानकारी जुटाई। संबंधित स्कूलों से आवश्यक दस्तावेज भी लिए गए और पूरी जानकारी को तैयार कर जिला कार्यालय भेज दिया गया।लेकिन दस्तावेज जिला कार्यालय पहुंचने के बाद मामला आगे कितना बढ़ा, गैस सिलेंडर और चूल्हे की व्यवस्था के लिए क्या निर्णय लिया गया और कब तक सुविधा उपलब्ध होगी इसकी जानकारी न महिला स्वसहायता समूह को है न कोई अधिकारी को ऐसे में मध्यान भोजन पकाने वाले महिलाओं जहरीली धुआँ के बीच खाना पकाना मजबूरी होगा

इस सम्बन्ध में बीईओ नीलांबर कश्यप ने बताया की मेरे पदस्थापना पहले जिला से गैस कनेक्शन संबंधित जानकारी मांगा गया था और पूरी जानकारी जिला भेजा गया पुनः मध्यान भोजन संचालित समूह की माँग उच्च अधिकारियों समक्ष रखा जाएगा।

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