धमतरी। जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जलाशयों और नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा दिया है। जिले के चार प्रमुख जलाशय लगभग लबालब हो चुके हैं। गंगरेल बांध का जलस्तर 97.40 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसके बाद जलभराव को नियंत्रित करने के लिए तीन गेट खोल दिए गए हैं। बांध से हजारों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बावजूद कुछ लोग गंगरेल डैम के मुहाने पर अपनी जान जोखिम में डालकर मछली पकड़ते नजर आ रहे हैं। इस लापरवाही ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

चारों जलाशयों में तेजी से बढ़ा पानी
लगातार बारिश के कारण जिले के प्रमुख जलाशयों में पानी की आवक तेज हो गई है। गंगरेल जलाशय 97.40 प्रतिशत, मुरुमसिल्ली (माडमसिल्ली) 98.61 प्रतिशत, दुधावा 86.86 प्रतिशत और सोंढूर जलाशय 69.25 प्रतिशत भर चुका है। जलाशयों में लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और जल संसाधन विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं।
गंगरेल के तीन गेट खोले, महानदी में छोड़ा जा रहा पानी
गंगरेल जलाशय में पानी की आवक बढ़ने के बाद तीन गेट खोल दिए गए हैं। वर्तमान में कुल 4,670 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसमें 1,410 क्यूसेक पानी रुद्री बैराज के जरिए नहर में और 3,360 क्यूसेक पानी सीधे महानदी में छोड़ा जा रहा है। पानी छोड़े जाने के कारण महानदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। नदी किनारे बसे गांवों में संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन सतर्क है।

प्रशासन की चेतावनी के बावजूद डैम के मुहाने पर भीड़
प्रशासन लगातार लोगों से नदी, नाले और जलाशयों के आसपास नहीं जाने की अपील कर रहा है। खासकर ऐसे स्थानों से दूर रहने की चेतावनी दी जा रही है, जहां पानी का बहाव तेज है। इसके बावजूद गंगरेल डैम के मुहाने पर कुछ लोग बेखौफ होकर मछली पकड़ते दिखाई दे रहे हैं।
सामने आई तस्वीरों में तेज बहाव वाले क्षेत्र में लोग जाल डालकर मछली पकड़ते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ बच्चे भी डैम के किनारे घूमते दिखाई दे रहे हैं। जिस स्थान पर हजारों क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, वहां इस तरह लोगों की मौजूदगी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
एक चूक और जा सकती है जान
गंगरेल डैम से छोड़े जा रहे पानी का बहाव सामान्य स्थिति की तुलना में बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे में पानी के किनारे खड़े होकर मछली पकड़ना बेहद जोखिम भरा है। अचानक जलस्तर बढ़ने, पैर फिसलने या तेज बहाव की चपेट में आने से किसी की जान जा सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन ने नदी और जलाशयों के आसपास नहीं जाने की चेतावनी जारी की है, तो डैम के संवेदनशील हिस्से में लोग पहुंच कैसे रहे हैं? क्या वहां पर्याप्त बैरिकेडिंग है? क्या सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है? यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
निचले इलाकों में अलर्ट, मैदानी अमला निगरानी में
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। मैदानी अमले को भी लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बारिश का दौर जारी रहने के कारण आने वाले समय में जलाशयों में पानी की आवक और बढ़ सकती है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलस्तर पर निगरानी के साथ-साथ लोगों को खतरनाक स्थानों तक पहुंचने से रोकना है।
गंगरेल डैम के मुहाने की तस्वीरें यह सवाल जरूर खड़ा कर रही हैं कि जब खतरा साफ दिखाई दे रहा है, तो सुरक्षा इंतजाम कितने पुख्ता हैं? अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी कि वह ऐसे संवेदनशील स्थानों पर लोगों की आवाजाही रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।






