रायपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को लेकर छत्तीसगढ़ के बाजारों में इस वर्ष खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। देश के प्रमुख व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के छत्तीसगढ़ चैप्टर के आकलन के अनुसार जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेश में करीब 750 से 800 करोड़ रुपये के कारोबार की संभावना है। पर्व के दौरान पूजा सामग्री, मिठाई, डेयरी उत्पाद, फूल-सजावट, फल-सूखे मेवे, पारंपरिक परिधान, लड्डू गोपाल की मूर्तियां एवं श्रृंगार सामग्री सहित होटल, परिवहन और अन्य सेवा क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।
CAIT के नेशनल वाइस चेयरमैन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य अमर पारवानी ने कहा कि जन्माष्टमी केवल आस्था और भक्ति का पर्व नहीं, बल्कि स्थानीय व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। पर्व के दौरान बढ़ने वाली खरीदारी का सीधा लाभ छोटे और मध्यम व्यापारियों के साथ कारीगरों, स्थानीय उत्पादकों, दुग्ध व्यवसायियों, मिठाई विक्रेताओं, फूल कारोबारियों, परिवहन एवं सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को मिलता है।
डेयरी और मिठाई की मांग में तेजी
जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों के साथ मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा फल, सूखे मेवे, प्रसाद सामग्री, धूप-अगरबत्ती, पंचामृत, पूजा किट, फूल-मालाएं, बंदनवार, झूले और सजावटी सामग्री की बिक्री भी तेज होने की संभावना है। लड्डू गोपाल की मूर्तियों के साथ मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और आभूषण सहित विशेष परिधानों की भी मांग बढ़ रही है।
धार्मिक आयोजनों से होटल-परिवहन कारोबार को भी फायदा
जन्माष्टमी पर प्रदेशभर में मंदिरों, धार्मिक स्थलों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा झांकी, भजन-कीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने के साथ होटल, रेस्तरां, परिवहन, प्रसाद, फूल और सजावट सहित स्थानीय सेवा क्षेत्र में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं।
पारवानी ने कहा कि जन्माष्टमी के दौरान स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक वस्तुओं की मांग बढ़ना छोटे कारोबारियों के लिए सकारात्मक संकेत है। मिट्टी की मूर्तियों, हस्तनिर्मित सजावटी सामग्री, पारंपरिक परिधान, पूजा सामग्री और स्थानीय स्तर पर तैयार मिठाइयों से जुड़े अनेक कारोबारियों को पर्व का सीधा लाभ मिलता है।
त्योहारों से कई क्षेत्रों में पहुंचता है आर्थिक लाभ
CAIT के अनुसार त्योहारों के दौरान होने वाली खरीदारी का लाभ केवल खुदरा विक्रेताओं तक सीमित नहीं रहता। इसकी आर्थिक श्रृंखला उत्पादकों, किसानों, कारीगरों, महिला उद्यमियों, थोक एवं खुदरा व्यापारियों, परिवहनकर्ताओं और विभिन्न सेवा प्रदाताओं तक पहुंचती है। इसी वजह से त्योहारों का व्यापार छत्तीसगढ़ की जमीनी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
CAIT छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन ने बताया कि रायपुर के साथ बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, राजनांदगांव, धमतरी, महासमुंद, रायगढ़, अंबिकापुर और जगदलपुर सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों और कस्बों में जन्माष्टमी को लेकर बाजारों और धार्मिक स्थलों पर तैयारियां की गई हैं।
अमर पारवानी ने कहा कि “जन्माष्टमी में भक्ति के साथ व्यापार की भी एक पूरी आर्थिक श्रृंखला सक्रिय होती है। मंदिरों की सजावट से लेकर पूजा सामग्री, फूल, मिठाई, डेयरी उत्पाद, वस्त्र और धार्मिक पर्यटन तक अनेक व्यवसाय इससे जुड़े हैं। यही हमारे त्योहारों की आर्थिक शक्ति है।”
CAIT छत्तीसगढ़ ने व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए त्योहार के अवसर पर स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों और छत्तीसगढ़ में निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की है। संगठन का कहना है कि स्थानीय उत्पादों की खरीदारी से प्रदेश के व्यापार और रोजगार को मजबूती मिलेगी।






