स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से जुड़े 100 करोड़ रुपए के मानहानि मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने पूर्व आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने धोनी की गवाही दर्ज कराने की प्रक्रिया को कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की थी। कोर्ट ने साफ कर दिया कि सेलिब्रिटी क्रिकेटर होने के बावजूद धोनी को गवाही के दौरान किसी तरह का वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं दिया जाएगा।
कोर्ट के आदेश के मुताबिक धोनी का बयान कोर्ट परिसर या किसी सरकारी भवन में दर्ज किया जाएगा। गवाही की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए न्यायिक अधिकारी की मौजूदगी रहेगी। इसके अलावा बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाएगी।
संपत कुमार की तीनों मांगों पर कोर्ट की मुहर
पूर्व आईपीएस जी. संपत कुमार ने धोनी की गवाही को लेकर कोर्ट के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं। पहली मांग थी कि बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक न्यायिक अधिकारी नियुक्त किया जाए। दूसरी मांग के तहत पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने और उसकी बिना एडिट की गई कॉपी उन्हें तथा कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिकारी को उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
तीसरी मांग सबसे महत्वपूर्ण थी। संपत कुमार ने कहा था कि धोनी जैसे सेलिब्रिटी क्रिकेटर की गवाही किसी फाइव स्टार या लग्जरी होटल में दर्ज नहीं की जानी चाहिए। बयान कोर्ट परिसर अथवा सरकारी भवन में ही रिकॉर्ड किया जाए। हाईकोर्ट ने इन तीनों मांगों को स्वीकार कर लिया है।
2014 में धोनी ने दायर किया था मानहानि का केस
मामला आईपीएल-2013 में सामने आए कथित सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग विवाद से जुड़ा है। महेंद्र सिंह धोनी ने वर्ष 2014 में पूर्व आईपीएस जी. संपत कुमार, जी मीडिया, न्यूज नेशन नेटवर्क और जी न्यूज के तत्कालीन संपादक एवं बिजनेस हेड सुधीर चौधरी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
धोनी का आरोप था कि आईपीएल-2013 के सट्टेबाजी विवाद में उनका नाम घसीटा गया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। इसी मामले में उन्होंने 100 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की थी।
अब धोनी की गवाही पर टिकी नजरें
हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद इस मामले में धोनी की गवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोर्ट ने गवाही की प्रक्रिया को पारदर्शी और निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के तहत कराने के निर्देश दिए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि धोनी का बयान कब दर्ज होता है और इस दौरान मामले में आगे क्या कानूनी मोड़ आता है।






