रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में 21 सितंबर से चिकित्सा सेवा प्रभावित हो सकती है। जूनियर डाॅक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) ने 17 सूत्रीय मांगों को लेकर 21 सितंबर सुबह आठ बजे से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार करने की घोषणा की है। इसमें मेडिकल इंटर्न, रेजिडेंट डाक्टर, सीनियर रेजिडेंट और बांडेड डाक्टर शामिल होंगे। जेडीए ने अपनी मांगों को लेकर शासन को 15 दिन पहले सूचना दे दी थी।
जूनियर डाक्टरों की प्रमुख मांगों में इंटर्न और पीजी रेजिडेंट का स्टाइपेंड बढ़ाना, बांड सेवा की अवधि और राशि में बदलाव, उच्च शिक्षा के दौरान संपत्ति गिरवी रखने की अनिवार्यता खत्म करना और बांड सेवा को सीनियर रेजिडेंसी के अनुभव के रूप में मान्यता देना शामिल है।
स्टाइपेंड बढ़ाकर इतना करने की मांग
संगठन ने एमबीबीएस इंटर्न का स्टाइपेंड 15,900 से बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है। वहीं पीजी के प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के रेजिडेंट डाक्टरों के लिए क्रमश: 1.20 लाख, 1.25 लाख और 1.30 लाख रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड की मांग रखी गई है।
बांड अवधि घटाने की मांग
बांड सेवा में कार्यरत एमबीबीएस डाक्टरों के लिए 80 हजार और पोस्ट-पीजी विशेषज्ञों के लिए 1.35 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन की मांग है। इसके साथ ही बांड की अवधि एक वर्ष करने, पुराने एमबीबीएस बांड की सेवा को पीजी बांड में जोड़ने और पात्र डाक्टरों को समय पर बांड पोस्टिंग देने की मांग भी शामिल है।
सुपर स्पेशलिटी के लिए अलग कैडर की मांग
जेडीए ने सरकारी अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी के लिए अलग कैडर बनाने, लंबित आयुष्मान प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने और संविदा डाक्टरों के मानदेय में वृद्धि की मांग भी की है। डाक्टरों के लिए डीए, टीए, एचआरए और एनपीए जैसी सुविधाएं देने तथा नियमित वेतन पुनरीक्षण की व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी गई है।
मेडिकल कालेजों के अस्पताल में ज्यादा असर
कार्य बहिष्कार का सबसे ज्यादा असर मेडिकल कालेज से जुड़े अस्पतालों की ओपीडी, वार्ड और अन्य सेवाओं पर पड़ सकता है। रायपुर के आंबेडकर अस्पताल और मेडिकल कालेज के अलावा बिलासपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर, रायगढ़, राजनांदगांव और कांकेर के सरकारी अस्पतालों में भी सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। जेडीए का कहना है कि मांगों पर समाधान नहीं होने तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।






