रायपुर। कामर्शियल गैस के दामों में बढ़ोतरी मोदी सरकार का जनता पर महंगाई और बोझ है। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि मोदी सरकार ने कामर्शियल सिलेंडर के दामों में 62.50 रू. से लेकर 71.50 रू. तक महंगा कर दिया। पिछले 9 माह में कामर्शियल सिलेंडर के दाम में 1270 रू. की बढ़ोतरी मोदी सरकार ने किया है। मतलब हर माह 141 रू. दाम बढ़ाया गया है। कामर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाने से बाजार में मिलने वाली खाद्य सामग्री, रेस्टोरेंट, होटलों में मिलने वाले कुक फुड नाश्ता, भोजन आदि के दाम स्वाभाविक रूप से और बढ़ जायेंगे।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि कामर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से इंडस्ट्रियल उत्पादों के दाम भी बढ़ जायेंगे। सुई से लेकर लौह उत्पादों के दाम भी बढ़ेंगे। छत्तीसगढ़ के आयरन उद्योगों पर भी इसका असर पड़ेगा, भाव बढ़ेगा और महंगाई भी बढ़ेगी।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि मोदी सरकार जब से सत्ता में आई है, महंगाई से देश के नागरिकों की कमर टूटती जा रही है। 2014 में जो गैस का सिलेंडर 410 रू. का था, आज वह 1000 रू. के पार है वह भी मिल नहीं रहा। पेट्रोल के दाम 70 रू. प्रति लीटर से बढ़कर 108 रू. प्रति लीटर के पार हो गए है, जबकि डीजल के दाम 55 रू. प्रति लीटर से बढ़कर 104 रू. प्रति लीटर के करीब पहुंच गए है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि मोदी राज में महंगाई बेलगाम आम आदमी का बजट बिगड़ गया है। जनविरोधी मोदी सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में 22 प्रतिशत की भारी भरकम वृद्धि की, जिसके चलते ही बाजार में सभी तरह के खाद्य तेलों के दाम लगभग डेढ़ गुना बढ़ गए। क्रूड पॉम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी 5.5 के स्तर से बढ़कर 27.5 प्रतिशत कर दिया गया है, अर्थात सीधे तौर पर 22 फीसदी की बढ़ोतरी मोदी सरकार के मुनाफाखोरी का प्रमाण है। जिन खाद्य तेलों का उत्पादन स्थानीय स्तर पर होते है उनमें सेंट्रल एक्साइज के दरों में वृद्धि का प्रभाव नहीं होना चाहिए था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार का संरक्षण जमाखोरों और मुनाफाखोरों को है, जिसके चलते राइस ब्रांड सरसो तेल जैसे सभी तरह के खाद्य तेलो के दाम डेढ़ गुना बढ़ा दिया गया है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि मोदी राज में लगातार रुपए का अवमूल्यन हो रहा है। खाद्य मुद्रास्फीति नियंत्रित करने में यह सरकार पूरी तरह नाकाम हो चुकी है। यही कारण है कि तमाम खाद्य पदार्थों की कीमतों में इसका असर साफ दिख रहा है। दाल की कीमते दोगुनी हो गई है, लहसुन 400 किलो, आलू, प्याज, टमाटर के दाम आसमान छू रहे है। एक तरफ बढ़ती बेरोजगारी, घटते इनकम से लोग परेशान है वहीं दैनिक उपभोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने घर का बजट बिगाड़ दिया है।






