बसों का किराया बढ़ाया जाना जनता पर अन्याय – कांग्रेस

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बसों का किराया बढ़ाया जाना जनता पर अन्याय - कांग्रेस

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि एक साल के भीतर दूसरी बार बस किराए में की गई बेतहाशा बढ़ोत्तरी को आम छत्तीसगढ़िया की जेब पर सीधा डकैती है। छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने आम जनता, मजदूरों, किसानों और छात्रों की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है। एक साल के भीतर दूसरी बार बस किराए में भारी वृद्धि कर साधारण बसों का किराया 75 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। स्लीपर, एसी, सेमी-स्लीपर से लेकर लग्जरी बसों तक का सफर अब आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुका है। महतारी वंदन के नाम पर 1000 की पब्लिसिटी करने वाली सरकार अब किराए के रूप में हर परिवार से हजारों रुपये वसूल रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस जनविरोधी फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग करती है। खाद्य सामाग्री, राशन, तेल, दाल, सब्जियों के दाम दुगुना हो गया है। बिजली के दाम बढ़ा दिये। डीजल, पेट्रोल के दाम बढ़ा दिया, रसोई गैस के दाम बढ़ा दिया। महंगाई के लिए डबल इंजन की सरकार जवाबदार।

बिजली उपभोक्ताओ का बढ़े बिजली बिल के अलावा कोयले का अतिरिक्त प्रभार वसूला जा रहा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि अक्टूबर महिने में प्रति उपभोक्ता से 300 रू. से लेकर 1000 रू. तक का अतिरिक्त प्रभार सरकार के द्वारा लगाया गया है। यह प्रभाव शुल्क बिजली बिल के अलावा उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भेजा गया है। जिन उपभोक्ताओं के ऑनलाइन केवल बिजली बिल पटाया तथा कोयला प्रभार शुल्क नहीं पटाया है, उनकी बिजली काट दी जा रही है। भाजपा सरकार ने बिजली विभाग को जबरिया वसूली का विभाग बना लिया है। इस साल अक्टूबर में जिनका बिजली बिल पटाने की नियत तारीख नहीं आई है। उनका भी पिछला प्रभार बकाया बता कर विद्युत कनेक्शन काट दिया जा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि बिजली विभाग का उद्देश्य उपभोक्ताओं को लूटना है। बिजली आवश्यक जरूरत बन गयी है। उसका फायदा सरकार और बिजली विभाग उठा रहा, कभी अनुबंध भार से ज्यादा खपत बताकर दंड वसूला जा रहा तो कभी सेस लगाकर, कभी कोयले का अतिरिक्त प्रभार लगाकर वसूली की जा रही।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के बाद लगातार पांचवी बार बिजली के दाम बढ़ाये गये है। भाजपा सरकार ने इसी साल जुलाई से घरेलू उपभोक्ताओं के दाम में 30 से 50 पैसे तथा गैर घरेलू में 20 से 40 पैसे की बढ़ोत्तरी किया है। कृषि के पंप की बिजली में भी 40 पैसे की बढ़ोत्तरी की गयी है। बिजली के बेतहाशा बिल जनता की परेशानी का कारण बने हुये है। हाल ही में भाजपा सरकार ने बिजली के दामों में 12 प्रतिशत विद्युत ईधन अधिभार (एमपीपीएस) के रूप में बढ़ोत्तरी किया था। भाजपा की सरकार आने के बाद अभी तक 31.23 प्रतिशत बिजली के दाम बढ़ाये गये है। कांग्रेस की सरकार ने 5 साल में केवल 2 पैसे की बढ़ोत्तरी बिजली के दामों में किया था, उसमें भी 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना लागू थी।

पटवारी हड़ताल पर
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश भर में पटवारी तीन सूत्रीय मांग को लेकर हड़ताल पर है। पिछले वर्ष भी धान खरीदी शुरू होने के पहले पटवारी हड़ताल पर गये थे। सरकार हड़ताल की नौबत क्यों आने देती है? यह हड़ताल सरकार की साजिश लग रही। पोर्टल में परेशानी आ रही तो सरकार उसका हल देखे। पटवारियों की हड़ताल से धान खरीदी बाधित होती है, पंजीयन समय पर नहीं हो रहा। सरकार इस हड़ताल को खत्म कराये ताकि हड़ताल के कारण धान खरीदी प्रभावित नहीं हो।

पीएससी ने एक और परीक्षा स्थगित किया
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पीएससी ने एसआई और सूबेदार भर्ती परीक्षा स्थगित कर दिया। इसके पहले पीएससी 2025 का इंटरव्यू स्थगित किया गया था। ऐसी परिस्थितियां क्यों निर्मित हो रही है? शिक्षक भर्ती परीक्षा भी स्थगित हो गयी, आरक्षक भर्ती के परिणाम नहीं घोषित किये जा रहे। डीईडी के लिए भर्ती नहीं निकाली जा रही। प्रदेश के विभिन्न विभागों में 1.10 लाख पद खाली है। सरकार भर्ती करने के बजाए टालमटोल कर रही। भाजपा सरकार प्रदेश के युवाओं को धोखा दे रही है।

सुतली और प्लास्टिक भी गुजरात से तय होकर आएगी? सहकारी समितियों की स्वायत्तता खत्म कर रही है सरकार
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि स्थानीय छत्तीसगढ़ी व्यापारियों और सोसायटियों को दरकिनार कर गुजरात की पसंदीदा कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में अनुचित बदलाव किया गया है। तिरपाल, कैप कवर, कैमरा और सुतली जैसी बुनियादी सामग्रियां खरीदने का संवैधानिक व प्रशासनिक अधिकार जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के अधीन प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के पास होता है। अपेक्स बैंक के माध्यम से केंद्रीकृत टेंडर निकालकर स्थानीय सोसायटियों के अधिकार छीन लिए गए हैं। स्थानीय छत्तीसगढ़ी व्यापारियों और सोसायटियों को दरकिनार कर गुजरात की पसंदीदा कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में अनुचित बदलाव किया गया है।

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