रायपुर। राजधानी रायपुर में दशहरे को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 20 अक्टूबर को शहर के विभिन्न मैदानों में रावण दहन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। WRS मैदान में 101 फीट ऊंचे रावण का दहन मुख्य आकर्षण रहेगा। वहीं, बोरियाखुर्द में रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले भी जलाए जाएंगे। इस बीच, रावण के पुतले बनाने की लागत में इस साल 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। बांस, कागज, रंगीन पेपर, कपड़ा, पेंट और सजावट की सामग्री महंगी होने से कारीगरों का खर्च बढ़ गया है।
WRS मैदान में सुरक्षा के लिए रेलवे ने किए विशेष इंतजाम
WRS मैदान में दशहरा उत्सव के दौरान उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए रेलवे ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। मैदान के पास से मुंबई-हावड़ा रेल लाइन गुजरती है। ऐसे में लोगों के रेलवे ट्रैक तक पहुंचने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
रेलवे के मुताबिक, 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे तक उरकुरा से रायपुर स्टेशन के बीच ट्रेनों की अधिकतम गति 15 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित रहेगी। इस दौरान लोको पायलट लगातार हॉर्न बजाते हुए ट्रेन चलाएंगे। जरूरत पड़ने पर ट्रेन को रोका भी जा सकेगा।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत आरपीएफ, जीआरपी और स्थानीय पुलिस के करीब 250 जवान तैनात रहेंगे। रेलवे ट्रैक के पास बैरिकेडिंग की जाएगी। इसके अलावा हर 10 मिनट में माइक से अनाउंसमेंट कर लोगों को पटरियों से दूर रहने की अपील की जाएगी। ट्रैक पर लगातार निगरानी भी रखी जाएगी।
ट्रेनों में 5 से 10 मिनट तक की देरी की संभावना
ट्रेनों की गति सीमित रखे जाने के कारण यात्रियों को कुछ देरी का सामना करना पड़ सकता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सामान्य स्थिति में ट्रेनों के करीब पांच मिनट और अधिक भीड़ वाले समय में 10 मिनट तक लेट होने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक देरी परिचालन की स्थिति पर निर्भर करेगी।
रायपुर के सीनियर डीसीएम सुस्कर विपुल विलासराव ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी दशहरा उत्सव के दौरान WRS मैदान के पास ट्रेनों की गति 15 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जाएगी। ट्रेनें हॉर्न बजाते हुए गुजरेंगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें रोका जा सकेगा।
शाम को फाफाडीह से WRS मैदान तक जाम की आशंका
WRS मैदान में रायपुर सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग रावण दहन देखने पहुंचेंगे। दोपहर से ही लोगों की भीड़ जुटने लगेगी, जबकि शाम के समय आवाजाही बढ़ने से फाफाडीह से WRS मैदान तक जाम लगने की आशंका है। यातायात व्यवस्था संभालने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस की टीम तैनात रहेगी।
बोरियाखुर्द में 45 फीट के रावण के साथ जलेगा कुंभकर्ण-मेघनाथ का पुतला
बोरियाखुर्द के खेल मैदान में दशहरा सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान 45 फीट ऊंचे रावण तथा 30-30 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाएगा। आयोजन के तहत दिन में पतंग उत्सव होगा। दोपहर 4 बजे सांस्कृतिक नृत्य और योग प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
शाम 5 बजे भगवान श्रीराम और माता सीता की पूजा-अर्चना के साथ दीप प्रज्वलन होगा। शाम 5:30 बजे रामलीला का मंचन किया जाएगा। इसके बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन तथा आतिशबाजी होगी। रात 8 बजे उज्जैन के भजन गायक सन्नी अलबेला और उनकी टीम भजनों की प्रस्तुति देगी।
सप्रे स्कूल मैदान में शाम 6 बजे होगा रावण दहन
बूढ़ापारा स्थित सप्रे स्कूल मैदान में दशहरा उत्सव शाम 4 बजे भजन जेमिंग के साथ शुरू होगा। इसमें स्थानीय और अन्य भजन गायक भगवान श्रीराम तथा माता दुर्गा के भक्ति गीत प्रस्तुत करेंगे।
शाम 6 बजे श्रीराम-लक्ष्मण की झांकी के साथ 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। इसके बाद शाम 6:30 बजे आतिशबाजी होगी। बूढ़ापारा दशहरा उत्सव समिति पिछले 15 वर्षों से यहां आयोजन कर रही है। इस बार भी समिति की ओर से लोगों के बैठने, मंच और रोशनी की व्यवस्था की जा रही है।
रावणभाठा और BTI मैदान में भी तैयारियां
रायपुर के रावणभाठा मैदान में नगर निगम की ओर से दशहरा आयोजन के लिए साफ-सफाई, रोशनी, पेयजल और अग्निशमन जैसी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग रावण दहन देखने पहुंचते हैं।
वहीं, शंकर नगर स्थित BTI मैदान में खम्हारडीह सार्वजनिक दशहरा एवं सांस्कृतिक समिति की ओर से उत्सव आयोजित किया जाएगा। आयोजन की तैयारियों का शुभारंभ छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने भूमिपूजन कर किया। उन्होंने पूजा-अर्चना कर आयोजन की सफलता और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। समिति की ओर से कार्यक्रम की तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि, यहां रावण के पुतले की ऊंचाई और कार्यक्रम का समय अभी घोषित नहीं किया गया है।
पुतले बनाने की लागत 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी
रायपुर में इस साल रावण के पुतले बनाने की लागत में करीब 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पुतला बनाने वाले कारीगर गोपाल राव के मुताबिक, बांस, कागज, रंगीन पेपर, कपड़ा, पेंट और सजावट में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री के दाम बढ़ने से खर्च में इजाफा हुआ है।
पुतले का ढांचा तैयार करने से लेकर चेहरे की बनावट, कपड़े सिलने, रंगाई और सजावट तक कई चरणों में सामग्री और मेहनत लगती है। इसके अलावा पुतले में इस्तेमाल होने वाली आतिशबाजी का खर्च भी अलग होता है। पुतले की ऊंचाई बढ़ने के साथ सामग्री और मजदूरी का खर्च भी बढ़ जाता है।
कारीगरों के अनुसार, बांस से पुतले का ढांचा तैयार किया जाता है, जबकि कागज और कपड़े से उसे आकार दिया जाता है। इसके बाद रंगाई और सजावट का काम होता है। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पुतले की कुल लागत पर पड़ रहा है। इसके बावजूद दशहरे को लेकर शहर में उत्साह बना हुआ है और विभिन्न आयोजन समितियां रावण दहन कार्यक्रमों को भव्य बनाने में जुटी हैं।






