जनगणना और परीक्षाओं के बीच नियमों को ताक पर रखकर बेची जा रही है पोस्टिंग, शिक्षा विभाग बना वसूलीबाजों का चारागाह – कांग्रेस

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जनगणना और परीक्षाओं के बीच नियमों को ताक पर रखकर बेची जा रही है पोस्टिंग, शिक्षा विभाग बना वसूलीबाजों का चारागाह - कांग्रेस

रायपुर। जनगणना और एसआईआर जैसी अत्यंत संवेदनशील और कानूनी रूप से प्रतिबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच चल रहे बेलगाम तबादला उद्योग पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि इस सरकार में तबादला कोई प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बोली लगाने वाला एक खुला बाजार बन चुका है। चुनाव आयोग के नियमों को ताक पर रखकर जनगणना के समय ट्रांसफर करना, प्रशासनिक अराजकता की पराकाष्ठा है। सबसे अग्रणी स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट है, छत्तीसगढ़ के शिक्षा के मंदिर को इन लोगों ने वसूलीबाजों का चारागाह बना दिया है, जहां अर्धवार्षिक परीक्षा के समय गरीब बच्चों की पढ़ाई दांव पर लगी है।

प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि आज छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से गर्त में धकेल दिया है। भारत सरकार और चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश हैं कि जनगणना और एसआईआर प्रक्रिया के दौरान ड्यूटीरत कर्मचारियों-अधिकारियों का ट्रांसफर पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। लेकिन, साय सरकार में नियमों की बलि चढ़ाकर खुलेआम तबादला उद्योग चलाया जा रहा है। शिक्षा विभाग इसमें नंबर वन बन चुका है। शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय स्कूलों की चिंता इस सरकार को नहीं है उल्टे वहां पर से सुविधाजनक स्थानों पर पदस्थ कर रहे हैं। अर्धवार्षिक परीक्षाओं के ठीक बीच में, मोटी रकम की बोलियां लगाकर शिक्षकों और कर्मचारियों की पोस्टिंग खरीदी-बेची जा रही है। यह सरकार जनता के विकास के लिए नहीं, बल्कि उगाही और दलाली के लिए आई है।

प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि जनगणना जैसे गोपनीय और राष्ट्रीय कार्य के बीच में तबादलों का खेल इस बात का सबूत है कि इस सरकार में नीति-नियम नहीं, बल्कि वसूली का रेट कार्ड चल रहा है। छत्तीसगढ़ के गरीब बच्चों की शिक्षा को सत्ता में बैठे लोगों ने अपनी तिजोरी भरने का साधन बना लिया है। दूरदराज के आदिवासी और ग्रामीण अंचलों के स्कूलों को भगवान भरोसे छोड़कर शहरों में दलालों के जरिए पोस्टिंग बेची जा रही है। क्या अर्धवार्षिक परीक्षाओं और जनगणना के बीच में ही प्रशासनिक आवश्यकता जागती है? क्या ट्रांसफर के बदले ली जा रही दलाली के रेट तय करना ही साय का सुशासन है? यदि भाजपा सरकार में नैतिक साहस है तो पिछले कुछ महीनों में हुए सभी प्रशासनिक और शैक्षणिक तबादलों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच करवाएं और दोषियों पर कठोर कार्यवाही करें।

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