
आरंग के घाटों पर रातभर मशीनों से अवैध रेत खनन, प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल ?


आरंग–(रायपुर) खबर- दिन में शांत बहने वाली महानदी रात के अंधेरे में कथित तौर पर खनिज माफियाओं के कब्जे में चली जाती है। रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र में आधी रात के बाद भारी मशीनें नदी के भीतर उतरती हैं और हाईवा ट्रकों की कतारें रेत भरकर निकलती रहती हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि चिखली, कुरूद और हरदीडीह रेत घाटों पर रातभर अवैध रेत उत्खनन बदस्तूर जारी है। माफिया सुबह होने से पहले सैकड़ों ट्रिप रेत घाटों से रेत तस्करी कर गोरख कारोबार चला रहे हैं।
खनिज पट्टेधारक नियमों को खुली चुनौती देते हुए,
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों को ठेंगा दिखाते हुए अवैध रूप से रात में रेत खनन को अंजाम दिया जा रहा है। शासन के नियमों के मुताबिक़ शाम 7 बजे के बाद नदी से रेत खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
इसके बावजूद खनन माफियाओ को कोई सरकारी विभागों का कोई ख़ौफ़ नज़र नहीं आ रहा है।
ग्रामीणों द्वारा रिकॉर्ड किए गए गूगल वीडियो और तस्वीरों में रात के समय भारी मशीनों से रेत उत्खनन करते साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा है। लेकिन जिम्मेदार विभाग एवं निगरानी दस्ता कुभकर्णीय नींद में सोया हुआ है।
महानदी में अवैध रेत खनन आस्था पर भी चोट पहुचा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि
नदी के तट बाढ़ सुरक्षा टापू
और अंतिम संस्कार स्थलों के आसपास की जमीन रेत माफियाओ के भेट चड गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थिति उनकी धार्मिक आस्था और परंपराओं के लिए गहरी पीड़ा का कारण बन रही है।
इस गंभीर समस्याओ को लेकर
सरकार तक पहुंची शिकायत।
इस पूरे मामले को उठाते हुए आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े ने छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव, खनिज साधन विभाग और रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह को शिकायत पत्र प्रेषित किया है।

श्री जांगड़े ने मांग की है कि:
महानदी घाटों पर चल रही अवैध रेत उत्खनन की निष्पक्ष जांच कराई जाए और रात्रिकालीन खनन पर सख्ती से रोक लगाई जाये
अवैध खनन पर रॉयल्टी और जुर्माना वसूली की कार्यवाही में तत्परता से कार्यवाही किये जाने का अनुरोध प्रशासन से किया है। साथ ही
जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित किये जाने का अनुरोध शासन से किया है और पट्टाधारकों द्वारा नियम विरुद्ध रेत घाटो के संचालन पर कड़ी कार्रवाई किये जाने की मांग किया है।
महानदी में रेत खनन का काला कारोबार
आरंग क्षेत्र के ग्राम चिखली, कुरूद और हरदीडीह घाट में चल रहा है। जिस पर
नियम क्या कहते हैं?
NGT के अनुसार शाम 7 बजे के बाद नदी से रेत खनन प्रतिबंधित है। लेकिन
रातभर मशीनों से अवैध रेत उत्खनन चल रही है। जिसका
संभावित नुकसान
पर्यावरणीय क्षति और शासन को लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो रही हैं। लेकिन संबंधित विभाग और अमला जिनके कंधों पर निगरानी की ज़िम्मेदारी है। वो चुप चाप बैठी नजर आ रही हैं। जो गंभीर इशारा को पेदर्शित करती है।
ग्रामीणों की व्यथा है कि
रात होते ही घाटों पर मशीनें उतर जाती हैं। सुबह तक ट्रकों की लाइन लगी रहती है। अगर यही चलता रहा तो महानदी का स्वरूप बदल जाएगा और अस्तित्व खतरे में आ जाएगी।
( स्थानीय ग्रामीण का आरोप और बड़ा सवाल
जिस “माँ महानदी” ने सदियों से इस क्षेत्र को जीवन दिया,
क्या अब वही नदी रेत माफियाओं के लालच का शिकार बन रही है?
या फिर प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई कर
महानदी को बचाने के लिए निर्णायक कदम उठाएगा?




