साय कैबिनेट के बड़े फैसले : ग्रामीण रोजगार, आजीविका और बायोगैस को मिलेगा बढ़ावा, 4 हजार करोड़ की योजना को मंजूरी
रायपुर, 23 जून 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने तीन प्रमुख योजनाओं एवं नीतियों को मंजूरी प्रदान की।
ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिनों के रोजगार का अधिकार
मंत्रिपरिषद ने “विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़” के प्रारूप को मंजूरी दी। इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी।
योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण, आजीविका आधारित परिसंपत्तियों का विकास और टिकाऊ रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे। इसके साथ ही ग्राम पंचायत आधारित समेकित विकास, विभागीय योजनाओं के अभिसरण और पीएम गति शक्ति के साथ समन्वय को भी बढ़ावा मिलेगा।
पारदर्शिता और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक एवं डिजिटल प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य सरकार का व्यय अनुपात 60:40 रहेगा तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

“अटल आजीविका समृद्धि हाट” से गांवों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
कैबिनेट ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए “अटल आजीविका समृद्धि हाट” योजना शुरू करने का भी निर्णय लिया है।
इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हथकरघा, बुनाई-सिलाई, हस्तशिल्प जैसे सृजन केंद्र, दलहन, तिलहन, राइस मिल और डेयरी जैसी प्रसंस्करण इकाइयां, कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत और अटल डिजिटल केंद्र जैसे सेवा केंद्र, विपणन एवं आपूर्ति केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
योजना का उद्देश्य स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण, सेवा और विपणन गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीणों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के संचालन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को नोडल एजेंसी तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
छत्तीसगढ़ में लागू होगी नई कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति
मंत्रिपरिषद ने “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026” के प्रारूप को भी मंजूरी प्रदान की।
इस नीति के तहत कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट और अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उन्हें स्वच्छ गैसीय ईंधन कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) में परिवर्तित किया जाएगा।
सरकार के अनुसार यह नीति अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, जैव उर्वरक उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अनुसार राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख टन CBG उत्पादन की संभावना है।
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है, जबकि ऊर्जा विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासनिक आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
इन निर्णयों को ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




