टेट के विरोध में प्रदेशभर में शिक्षक सड़कों पर, बारिश में निकाली रैली: 20-28 साल सेवा दे चुके शिक्षकों ने कहा- अब परीक्षा की बाध्यता क्यों?
रायपुर। टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में मंगलवार को प्रदेशभर के शिक्षक सड़क पर उतरे। शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर जिला मुख्यालयों में शिक्षकों ने ‘टेट मुक्ति रैली’ निकाली और मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव व डीपीआई के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा। रायपुर समेत कई जिलों में झमाझम बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक रैली में शामिल हुए। हाथों में मांगों से जुड़े पोस्टर और नारे लगाते शिक्षक सेवा सुरक्षा और वेतन विसंगति दूर करने की मांग करते नजर आए।
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करना, संविलियन से पहले की सेवा की गणना कर पेंशन समेत सभी हितलाभ देना, केंद्रीय वेतनमान लागू कर वेतन विसंगति दूर करना, डीएड प्रशिक्षित शिक्षकों को ब्रिज कोर्स के जरिए बीएड कराने और भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त करना शामिल है।
बारिश में भी जुटे शिक्षक, जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन
मोर्चा के प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे और केदार जैन रायपुर की रैली में शामिल हुए। बिलासपुर में प्रांतीय संचालक संजय शर्मा ने रैली में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। बाकी जिलों में शालेय शिक्षक संघ, टीचर्स एसोसिएशन और संयुक्त शिक्षक संघ के जिला संचालकों की अगुवाई में रैलियां निकाली गईं।
रायपुर में रैली के दौरान शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मोर्चा पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से विभाग में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को अब टीईटी की परीक्षा की बाध्यता में डालना उनके लिए मानसिक दबाव का कारण बन रहा है।
मोर्चा बोला- नई भर्ती पर लागू हो नियम, पुराने शिक्षक हों मुक्त
प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे ने कहा कि टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश है। केंद्र सरकार से अध्यादेश में संशोधन कर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की जा रही है।
प्रांतीय महासचिव धर्मेश शर्मा और कार्यकारी प्रांताध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि शिक्षक अपनी योग्यता के आधार पर ही शिक्षा विभाग में नियुक्त हुए हैं। वर्ष 2010 में लागू नियम को 2010-11 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई शिक्षक 20 से 28 साल तक सेवा दे चुके हैं। ऐसे शिक्षकों को अब टीईटी पास करने की बाध्यता में डालना सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद टीईटी की अनिवार्यता नई नियुक्तियों पर लागू की जा सकती है, लेकिन पहले से नियुक्त शिक्षकों को इससे मुक्त रखा जाना चाहिए। सरकार को इस मामले का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
शिक्षक बोले- परीक्षा के तनाव का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी
प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने कहा कि शिक्षक के मन में यदि नौकरी, परीक्षा और भविष्य को लेकर लगातार तनाव रहेगा तो उसका असर शिक्षण कार्य पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि तनावग्रस्त शिक्षक से बेहतर शिक्षा की अपेक्षा करने के बजाय सरकार को पहले उसकी सेवा सुरक्षा और भविष्य की चिंता दूर करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षक का तनाव केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है। इसका असर कक्षा के वातावरण, शिक्षक-विद्यार्थी संवाद और सीखने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। इसलिए शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों को तनावमुक्त वातावरण देना जरूरी है।
वेतन विसंगति और पुरानी सेवा गणना भी बड़ा मुद्दा
मोर्चा ने केंद्रीय वेतनमान लागू कर सभी शिक्षक संवर्गों में व्याप्त वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग की है। इसके साथ ही संविलियन से पहले की सेवा को जोड़कर पेंशन सहित सभी हितलाभ देने की मांग भी उठाई गई। डीएड प्रशिक्षित शिक्षकों को ब्रिज कोर्स के माध्यम से बीएड कराने और भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
रैली में शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय पदाधिकारी सुनील सिंह, विष्णु शर्मा, डॉ. सांत्वना ठाकुर, सत्येंद्र सिंह, विवेक शर्मा, गजराज सिंह, राजेश शर्मा, शैलेश सिंह, प्रह्लाद जैन, संतोष मिश्रा, संतोष शुक्ला, शिवेंद्र चंद्रवंशी, दीपक वेंताल, यादवेंद्र दुबे, सर्वजीत पाठक, मंटू खैरवार, पवन दुबे, नंदकुमार अठभैया, भोजराम पटेल, विनय सिंह, आशुतोष सिंह, भानु डहरिया, रवि मिश्रा, बिजेंद्रनाथ यादव, जितेंद्र गजेंद्र, अजय वर्मा, कृष्णराज पांडेय, घनश्याम पटेल सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।
मोर्चा पदाधिकारियों ने कहा कि पांचों मांगों पर सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।






