रायपुर। रक्षाबंधन के अवसर पर इस वर्ष छत्तीसगढ़ के बाजारों में जमकर खरीदारी हुई। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के छत्तीसगढ़ बाजार आकलन के अनुसार, प्रदेश में रक्षाबंधन के दौरान लगभग 715 से 820 करोड़ रूपए की आर्थिक गतिविधियां हुईं। इनमें करीब 575 से 650 करोड़ रूपए का राखी कारोबार शामिल है, जबकि मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, परिधान, फैशन एक्सेसरीज़, एफएमसीजी गिफ्ट पैक्स, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों सहित अन्य उपहार सामग्री पर लगभग 140 से 170 करोड़ रूपए की अतिरिक्त खरीदारी का अनुमान है।
CAIT के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य अमर पारवानी ने कहा कि भारत केवल त्योहारों का देश नहीं, बल्कि ऐसी जीवंत सांस्कृतिक एवं आर्थिक व्यवस्था का केंद्र है, जहां प्रत्येक पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा देता है। उन्होंने कहा कि भारतीय त्योहार ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ के सशक्त स्वरूप का प्रतिनिधित्व करते हैं और करोड़ों लोगों के लिए व्यापार, रोजगार एवं आजीविका के अवसर पैदा करते हैं।
स्थानीय उत्पादों की ओर बढ़ा रुझान
पारवानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को इस वर्ष रक्षाबंधन पर व्यापक जनसमर्थन मिला। छत्तीसगढ़ के उपभोक्ताओं ने स्वदेशी और स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता दी। हस्तनिर्मित राखियों, पारंपरिक उपहार सामग्री, स्थानीय कारीगरों की वस्तुओं, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली।
इससे स्थानीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों और लघु उद्यमियों की आय बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी सृजित हुए। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्थानीय बाजारों की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
रायपुर सहित प्रमुख शहरों में रही रौनक
CAIT के अनुसार, राजधानी रायपुर के अलावा बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, राजनांदगांव, कोरबा, अंबिकापुर, जगदलपुर सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों, छोटे कस्बों और ग्रामीण बाजारों में भी रक्षाबंधन को लेकर अच्छी खरीदारी हुई। राखियों के साथ मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स, परिधानों और अन्य उत्सवी वस्तुओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
मिठाई और ड्राई फ्रूट्स पर सबसे अधिक खर्च
CAIT के बाजार आकलन के मुताबिक रक्षाबंधन के दौरान अतिरिक्त 140 से 170 करोड़ रूपए के उत्सवीय खर्च में लगभग 25 प्रतिशत राशि मिठाइयों एवं ड्राई फ्रूट्स पर खर्च होने का अनुमान है। वहीं 20 प्रतिशत परिधान एवं फैशन एक्सेसरीज़, 20 प्रतिशत एफएमसीजी गिफ्ट पैक्स, 15 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, 10 प्रतिशत सोने-चांदी एवं आभूषण तथा शेष 10 प्रतिशत अन्य उपहार वस्तुओं पर खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
त्योहार आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र : पारवानी
अमर पारवानी ने कहा कि दीपावली, होली, नवरात्र, गणेश उत्सव, दुर्गा पूजा, ईद, क्रिसमस, छठ पूजा और रक्षाबंधन जैसे त्योहार केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से किसानों, कारीगरों, शिल्पकारों, लघु उद्योगों, महिला उद्यमियों, परिवहन एवं सेवा क्षेत्र तथा थोक और खुदरा व्यापार से जुड़े लोगों को व्यापक आर्थिक अवसर मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ की नींव समाज, संस्कृति और व्यापार के गहरे संबंधों पर आधारित है। त्योहार इस संबंध को और मजबूत करते हुए आर्थिक गतिविधियों का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर जमीनी स्तर तक पहुंचाते हैं।
‘रक्षाबंधन आर्थिक समृद्धि का भी पर्व’
CAIT छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन ने कहा कि रक्षाबंधन आस्था, स्नेह, सामाजिक समरसता और आर्थिक समृद्धि का अद्भुत संगम है। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने के साथ स्थानीय व्यापार को सशक्त करता है, उद्यमिता को बढ़ावा देता है और रोजगार के अवसर पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ के बाजारों में दिखाई दी रौनक इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश के उपभोक्ता स्वदेशी एवं स्थानीय उत्पादों को तेजी से अपना रहे हैं। इससे स्थानीय व्यापार, एमएसएमई, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को मजबूती मिलेगी तथा आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में योगदान बढ़ेगा।
CAIT छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं।






