रायपुर। बिजली के स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता थोपने पर आक्रोश जताते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि एक तरफ केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने संसद में स्पष्ट किया है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं हैं, बल्कि यह उपभोक्ताओं की पसंद और राज्य बिजली बोर्डों के क्रियान्वयन पर निर्भर है लेकिन अब केंद्र सरकार धोखेबाजी पर उतर आई है और राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप कर रही है। राज्य की बिजली कंपनियों पर स्मार्ट मीटर का मॉडल जबरन थोप रही है।स्मार्ट मीटर की आपूर्ति और उनके। संचालन का ठेका निजी कंपनियों को देकर निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि बिजली समवर्ती सूची का विषय है केंद्र नीतियां तो बना सकता है, लेकिन किसी भी राज्य में उपभोक्ता स्तर पर इसे लागू करना राज्य सरकार और स्थानीय विद्युत नियामक बोर्ड (SERC) के अधिकार क्षेत्र में आता है। केंद्र ने इसे एक नीतिगत लक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया है, कानूनी रूप से उपभोक्ता के लिए अनिवार्य बाध्यता के रूप में नहीं, लेकिन भाजपा की सरकार अब नोटिस भेज कर बिजली उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर लगाने बाध्य कर रही है। गरीब और मध्यवर्ग के लिए प्रीपेड रिचार्ज न करा पाने पर तुरंत बिजली कट जाने की आशंका को लेकर विरोध किया जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा सरकार जनता से वादाखिलाफी कर रही है संसद में मोदी सरकार ने स्पष्टीकरण दिया है कि स्मार्ट मीटर लगाना या नहीं लगाना यह तय करना उपभोक्ता अधिकार है। विद्युत अधिनियम 2003 और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के नियमों के तहत उपभोक्ता की सहमति और विकल्प को प्राथमिकता दी गई है। केंद्र सरकार ने ‘रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम’ (RDSS) के तहत राज्यों को स्मार्ट मीटर लगाने के लिए वित्तीय सहायता और दिशा निर्देश दिए हैं, लेकिन कानूनन सीधे तौर पर सरकार उपभोक्ताओं पर कोई बाध्यता नहीं थोप सकती। उपभोक्ताओं की आम शिकायत है कि पुराने डिजिटल या एनालॉग मीटरों के मुकाबले स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में जबरिया फैसला थोपना अन्याय है, अत्याचार है।






