अपने नाम की सिम दूसरे को देना पड़ सकता है भारी, 3 साल तक जेल और 50 लाख रुपये जुर्माना

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अपने नाम की सिम दूसरे को देना पड़ सकता है भारी, 3 साल तक जेल और 50 लाख रुपये जुर्माना

रायपुर। अपने पहचान दस्तावेज पर सिम कार्ड लेकर उसे किसी दूसरे व्यक्ति को बेचने या किराये पर देने वालों के लिए दूरसंचार विभाग ने सख्त एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने मोबाइल यूजर्स को चेतावनी देते हुए कहा है कि टेलीकॉम पहचान और सिम कार्ड से जुड़ी जानकारी का गलत इस्तेमाल गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

फर्जी दस्तावेजों से सिम खरीदने-बेचने, किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर मोबाइल कनेक्शन लेने या मोबाइल के आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ करने पर 3 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

अपने नाम की सिम किसी और को देना भी अपराध
दूरसंचार विभाग के मुताबिक, फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड लेना, किसी अन्य व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर मोबाइल कनेक्शन हासिल करना या अपने नाम पर जारी सिम को किसी दूसरे व्यक्ति को धोखाधड़ी के लिए उपलब्ध कराना कानूनी अपराध है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

यह एडवाइजरी छत्तीसगढ़ में सामने आए सिम कार्ड के जरिए साइबर फ्रॉड के मामलों के बाद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

410 से ज्यादा लोगों के दस्तावेज का हुआ इस्तेमाल
छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों के दौरान 410 से अधिक लोगों के दस्तावेज का इस्तेमाल कर उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड जारी किए जाने का मामला सामने आया है। इन सिम कार्ड का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी में किया जाता रहा।

पुलिस ने इस मामले में मध्य प्रदेश के मैहर निवासी रामकृष्ण कुशवाहा को गिरफ्तार किया था। वह करीब चार साल पहले रायपुर आया था और गुढ़ियारी में रह रहा था। आरोप है कि उसने एक युवती से शादी करने के बाद उसके नाम पर सिम कार्ड उपलब्ध कराने का काम शुरू किया।

पुलिस के मुताबिक, सिम लेने आने वाले ग्राहकों का बायोमेट्रिक मशीन पर दो बार अंगूठा लगवाकर दो सिम जारी किए जाते थे। इनमें से एक सिम ग्राहक को दिया जाता था, जबकि दूसरा अपने पास रख लिया जाता था। आरोप है कि इस तरह 410 से अधिक सिम कार्ड निकालकर उन्हें गोवा में सक्रिय साइबर ठगों को बेच दिया गया।

एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन
देश में सामान्य तौर पर एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रखने की अनुमति है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में यह सीमा 6 मोबाइल कनेक्शन है।

सरकार ने 23 अगस्त से डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म में एक नया फीचर भी जोड़ा है। इसके जरिए तय सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन रखने वाले मामलों की पहचान करने के लिए फोटो समेत अन्य विवरणों का मिलान किया जा सकेगा।

इस व्यवस्था को लागू करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को अपने सिस्टम को सरकारी प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया गया है।

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