रायपुर। सरकार बताये तारा कोल ब्लॉक नीलामी कब रद्द होगी? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि तारा कोल ब्लॉक नीलामी के संबंध में सरकार की तरफ से कोई भी कदम नहीं उठाया गया है। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार तारा कोल ब्लाक को अडानी को सौंपने से पीछे नहीं हटने वाली भले ही इसके लिए लाखों पेड़ काटने पड़े, लेमरू हाथी अभ्यारण्य का नुकसान हो, आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन तबाह हो साय सरकार अडानी के हितों से समझौता नहीं करेगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि तारा कोल ब्लाक लगभग 5000 एकड़ क्षेत्र में फैला है, जिसमें से 4000 एकड़ से अधिक घना जंगल है। इसके लिए 10 लाख से अधिक पेड़ों को पूरी तरह काट दिया जाएगा। लेमरू एलीफेंट रिजर्व के चारों ओर खनन होगी, जिससे भारत के राष्ट्रीय धरोहर पशु हाथी के आवाजाही के रास्ते पर गंभीर असर पड़ेगा, जबकि हाथियों की संख्या में कमी का संकट पहले से ही बना हुआ है। कई अन्य प्रजातियां भी इससे और अधिक खतरे में पड़ जाएंगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि हसदेव अरण्य क्षेत्र के तारा कोल ब्लाक की नीलामी के लिए साय सरकार ने कोयला मंत्रालय को पत्र लिखा था। यह पत्र 11 दिसंबर 2025 को साय सरकार ने लिखा था जबकि कांग्रेस की भूपेश सरकार ने 23 जून 2023 को तारा सहित 9 कोल ब्लाको को नीलामी से अलग रखने के लिए पत्र लिखा था। भाजपा बताये कि उनकी सरकार ने तारा कोल ब्लॉक नीलामी के लिए अनुशंसा क्यों किया था?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जिस भाजपा सरकार ने स्वयं कोल ब्लॉक नीलामी के लिए केंद्र को पत्र लिखा हो वही आगे की अनुमति नहीं देगी, इस पर विश्वास नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार के कारण ही तारा कोल ब्लॉक की नीलामी भी हुई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार पर छत्तीसगढ़ को अडानीगढ़ बनाने पर तुली हुई है। सरकार के अडानी परस्त नीतियों से हसदेव अरण्य के घने जंगलों पर संकट उत्पन्न हो गया है। मोदी के मित्र अडानी के मुनाफे के लिए सरगुजा रेंज के केते एक्सटेंशन के खुदाई का गौतम अडानी को देने के लिए इस सरकार ने अनुमति दी है। अब रामगढ़ की पहाड़ियां, प्राचीन नाट्यशाला, सीता गुफा, जानकी रसोई, प्रभु श्री राम के वन गमन पथ की पुण्य स्मृतियों को अडानी के आर्थिक लाभ के लिए संकट में डाला जा रहा है। त्तीसगढ़ सरकार ने केते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल माइनिंग और पिट हेड कोल वॉशरी परियोजना के लिए 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोग में बदलने की परमीशन दी है।
राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद यह प्रस्ताव अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास भेजा गया, अब केंद्र ने अनुमति दे दिया है। केंद्र से हरी झंडी मिलते ही 7 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ हो गया। यह वही इलाका है जिसे सेंट्रल इंडिया का “लंग्स ज़ोन“ कहा जाता है। हसदेव अरण्य का यह क्षेत्र पांचवी अनुसूची का भाग है, जहां नए खदान स्थापित करने का लगातार विरोध स्थानीय आदिवासियों के द्वारा किया जा रहा है। यह सरकार आदिवासियों के अधिकारों को कुचल रही है। कई गांवों के आदिवासी समुदाय लगातार आंदोलित हैं, अति महत्वपूर्ण जैव विविधता संपन्न क्षेत्र में खनन से जंगल, जलस्रोत और उनकी परंपरागत आजीविका पर गहरा असर होगा। हाथियों और अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होगा और बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा, इस मुद्दे पर महीनों से आंदोलन चल रहा है, कई ग्राम सभाओं ने विरोधक प्रस्ताव भी पारित किये, लेकिन इस सरकार में किसी की सुनवाई नहीं है।






