रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की संवेदनशील पहल: नॉर्थ जोन के विवेचकों ने सीखी सांकेतिक भाषा, मूक-बधिर बच्चों ने जाना पुलिस का कामकाज

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रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की संवेदनशील पहल: नॉर्थ जोन के विवेचकों ने सीखी सांकेतिक भाषा, मूक-बधिर बच्चों ने जाना पुलिस का कामकाज

रायपुर। पुलिस कमिश्नरेट रायपुर की नॉर्थ जोन पुलिस ने मूक-बधिर बच्चों के साथ संवाद को आसान बनाने के लिए संवेदनशील पहल की है। “संकेत से संवाद—संवाद से समाधान” कार्यक्रम के तहत नॉर्थ जोन के विवेचकों को सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण दिया गया। वहीं कोपलवाणी स्पेशल स्कूल, सेमरिया के मूक-बधिर बच्चों ने DCP नॉर्थ जोन कार्यालय और थाना पंडरी का भ्रमण कर पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से जाना।

पुलिस कमिश्नरेट रायपुर द्वारा पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में “संवाद से समाधान” कार्यक्रम के माध्यम से पुलिस और आम नागरिकों के बीच सीधे संवाद को बढ़ाने, उनकी समस्याओं को समझने और समाधान की दिशा में कार्य करने की पहल लगातार की जा रही है।

पुलिस ने सीखी बच्चों से संवाद की भाषा
इसी कड़ी में नॉर्थ जोन द्वारा मूक-बधिर बच्चों को ध्यान में रखते हुए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य था कि ऐसे बच्चे, जो सामान्य बोलचाल के माध्यम से अपनी बात व्यक्त नहीं कर पाते, आवश्यकता पड़ने पर पुलिस से सहजता से संवाद कर सकें।

कार्यक्रम पुलिस उपायुक्त नॉर्थ जोन दीपमाला कश्यप के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नॉर्थ जोन आदित्य पांडे, एसीपी पंडरी कृष्ण कुमार चंद्राकर, एसीपी उरला पूर्णिमा लामा और कोपलवाणी से पद्मा शर्मा भी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम के पहले चरण में नॉर्थ जोन के सभी थानों के विवेचकों को सांकेतिक भाषा के प्रशिक्षकों द्वारा Sign Language का प्रशिक्षण दिया गया। पुलिसकर्मियों को आवश्यक संकेतों के साथ मूक-बधिर बच्चों से संवाद करने के व्यवहारिक तरीके भी समझाए गए।

इस प्रशिक्षण के पीछे उद्देश्य स्पष्ट था कि यदि किसी मूक-बधिर बच्चे के साथ कोई अपराध, दुर्घटना अथवा अन्य घटना होती है, तो संवाद की कठिनाई उसकी समस्या समझने में बाधा न बने। पुलिसकर्मी उसके संकेतों को समझ सकें, उससे जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकें और संवेदनशीलता के साथ आवश्यक सहायता एवं कार्रवाई कर सकें।

बच्चे पहुंचे पुलिस के बीच
इसके बाद कोपल वाणी स्पेशल स्कूल, सेमरिया, रायपुर के मूक-बधिर बच्चों ने DCP नॉर्थ जोन कार्यालय का भ्रमण किया। बच्चों को कार्यालय की विभिन्न व्यवस्थाओं और पुलिस की कार्यप्रणाली के बारे में सरल तरीके से जानकारी दी गई।

DCP नॉर्थ जोन दीपमाला कश्यप सहित उपस्थित अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों ने बच्चों से सांकेतिक भाषा के माध्यम से संवाद किया। बच्चों ने भी संकेतों के माध्यम से अपनी बातें साझा कीं और पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। इस दौरान बच्चों को यह अहसास कराने का प्रयास किया गया कि पुलिस उनकी बात समझने और आवश्यकता के समय उनकी सहायता के लिए उपलब्ध है।

बच्चों की प्रतिभा और हुनर को भी जाना
कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा Vocational Training एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के अंतर्गत तैयार किए गए विभिन्न पेंटिंग, आर्ट एवं क्राफ्ट तथा अन्य हस्तनिर्मित उत्पादों को भी देखा गया। बच्चों द्वारा अपनी रुचि एवं कौशल के अनुसार तैयार किए गए इन उत्पादों और कलाकृतियों को देखकर पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनके हुनर की सराहना की।

बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और उनके हुनर को रोजगार एवं स्वावलंबन से जोड़ने के उद्देश्य से पुलिस अधिकारियों द्वारा बच्चों के बनाए गए कुछ उत्पादों की खरीदारी भी की गई। इस पहल के माध्यम से बच्चों की मेहनत को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ उनके vocational training से जुड़े कार्यों में सहयोग करने का प्रयास किया गया।

पुलिस की इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों की प्रतिभा की सराहना करना नहीं, बल्कि उनके हुनर को पहचान देकर उन्हें आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना भी रहा। इससे बच्चों में अपने कौशल के प्रति विश्वास बढ़े और उनके द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को आगे रोजगार की संभावनाओं से जोड़ा जा सके।

बच्चों ने जाना थाना कैसे करता है काम
DCP कार्यालय के भ्रमण के बाद बच्चों को थाना पंडरी का भ्रमण कराया गया। यहां बच्चों ने थाना स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से जाना। उन्हें बताया गया कि पुलिस तक अपनी समस्या कैसे पहुंचाई जाती है, थाना किस प्रकार नागरिकों की सहायता करता है और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस से किस प्रकार संपर्क किया जा सकता है।

“संकेत से संवाद — संवाद से समाधान”
इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से नॉर्थ जोन पुलिस ने एक महत्वपूर्ण संदेश देने का प्रयास किया है—संवाद केवल शब्दों से नहीं होता। यदि कोई बच्चा बोलकर अपनी बात नहीं कह सकता, तो पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह उसके संकेतों को समझने का प्रयास करे।

पुलिसकर्मियों को सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण और मूक-बधिर बच्चों को पुलिस कार्यालय एवं थाना भ्रमण कराने की यह पहल इसी सोच का हिस्सा है कि संवाद की कोई भी बाधा किसी बच्चे को पुलिस की सहायता और सुरक्षा से दूर न करे।

साथ ही बच्चों की प्रतिभा, कौशल एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण को प्रोत्साहित करना इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा, ताकि सुरक्षा और संवाद के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास एवं स्वावलंबन को भी बढ़ावा मिले।

“संकेत से संवाद — संवाद से समाधान” के माध्यम से पुलिस कमिश्नरेट रायपुर का प्रयास है कि समाज के हर वर्ग, विशेषकर ऐसे बच्चों तक भी पुलिस का विश्वास, संवेदनशीलता और सुरक्षा का भरोसा पहुंचे, जिन्हें अपनी बात कहने के लिए शब्दों के बजाय संकेतों की आवश्यकता होती है।

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