57वीं जीएसटी परिषद के फैसलों से व्यापारियों को बड़ी राहत, कैट ने जताया आभार

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57वीं जीएसटी परिषद के फैसलों से व्यापारियों को बड़ी राहत, कैट ने जताया आभार

रायपुर। देश के प्रमुख व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में व्यापार एवं उद्योग जगत के हित में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का स्वागत किया है। कैट ने केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री तथा जीएसटी परिषद की अध्यक्ष निर्मला सीतारमण और परिषद के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन फैसलों से देशभर के व्यापारियों को अनुपालन, कार्यशील पूंजी, माल परिवहन और विभागीय कार्यवाही के मामलों में राहत मिलने की उम्मीद है।

कैट के नेशनल वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन जितेन्द्र दोशी, विक्रम सिंहदेव, प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन, वाइस चेयरमेन सुरिन्दर सिंह एवं जीवत बजाज, प्रदेश महामंत्री अवनीत सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष विजय पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष राजेन्द्र जग्गी, वासु माखीजा, राम मंधान, भरत जैन, राकेश ओचवानी और  शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से कहा कि जीएसटी व्यवस्था को सरल, पारदर्शी, तकनीक आधारित और व्यापारी-अनुकूल बनाने की दिशा में ये निर्णय महत्वपूर्ण हैं।

कैट के नेशनल वाइस चेयरमेन अमर पारवानी ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था में प्रक्रियागत सुधारों से व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि कर अनुपालन को आसान बनाने, वास्तविक खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुरक्षा, रिफंड प्रक्रिया को तेज करने और माल परिवहन को सुगम बनाने जैसे कदम व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेंगे।

गिरफ्तारी, अभियोजन और जुर्माने के प्रावधानों में राहत की उम्मीद
कैट के अनुसार, जीएसटी कानून की धारा 69 से संबंधित प्रावधानों में बदलाव की सिफारिश से ईमानदार व्यापारियों में गिरफ्तारी को लेकर व्याप्त भय कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव से छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। सामान्य जुर्माने की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने की सिफारिश को भी व्यापारियों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

वास्तविक खरीदारों के ITC की सुरक्षा पर जोर
कैट ने वास्तविक व्यापारिक लेन-देन करने वाले खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुरक्षा से संबंधित पहल का स्वागत किया। संगठन का कहना है कि यदि खरीदार ने वास्तविक रूप से माल या सेवा प्राप्त की है और निर्धारित वैधानिक शर्तों का पालन किया है, तो केवल आपूर्तिकर्ता द्वारा कर जमा नहीं किए जाने के कारण खरीदार को ITC के नुकसान से बचाने की दिशा में स्पष्ट व्यवस्था व्यापार जगत के लिए महत्वपूर्ण होगी।

रिफंड, पंजीयन और माल परिवहन होगा आसान
जीएसटी रिफंड प्रक्रिया को अधिक तेज और स्वचालित बनाने की सिफारिश से व्यापारियों की कार्यशील पूंजी तथा नकदी प्रवाह में सुधार की उम्मीद है। निर्धारित मामलों में 90 प्रतिशत तक अस्थायी रिफंड देने की प्रणाली आधारित व्यवस्था भी कारोबारियों के लिए लाभकारी मानी जा रही है।

इसके साथ ही, ई-वे बिल और माल परिवहन के मामलों में वाहनों को रोकने की प्रक्रिया को विशिष्ट खुफिया सूचना तथा सक्षम वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति से जोड़ने के प्रस्ताव से माल की आवाजाही अधिक सुगम हो सकती है। जीएसटी पंजीयन, संशोधन और निरस्तीकरण की प्रक्रियाओं को सरल एवं प्रणाली आधारित बनाने से कागजी कार्यवाही और विभागीय संपर्क में कमी आने की संभावना है।

छोटे व्यापारियों और ऑनलाइन कारोबारियों को मिलेगा अवसर
कैट ने छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए निर्धारित शर्तों के तहत बिना भौतिक प्रतिष्ठान के दूसरे राज्यों में कारोबार करने हेतु सरल जीएसटी पंजीयन की सुविधा देने की सिफारिश का स्वागत किया। संगठन के अनुसार, इससे छोटे व्यापारियों को डिजिटल कारोबार का विस्तार करने के नए अवसर मिल सकते हैं।

इसके अलावा, जीएसटी रिटर्न और ITC मिलान की प्रक्रिया में सुधार, पांच करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले तथा केवल B2C आपूर्ति करने वाले पात्र करदाताओं के लिए वार्षिक रिटर्न एवं त्रैमासिक कर भुगतान योजना को सैद्धांतिक मंजूरी और निर्धारित शर्तों के तहत विलंब शुल्क में राहत जैसे प्रस्तावों से अनुपालन संबंधी कठिनाइयां कम होने की उम्मीद है।

विभिन्न व्यापारिक क्षेत्रों को भी लाभ
कैट ने पुराने वाहन व्यापारियों के ITC, कबाड़ एवं अपशिष्ट व्यापार में रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM), इलेक्ट्रिक वाहन आधारित यात्री परिवहन, किराये की सेवाओं तथा ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं के लिए पांच प्रतिशत जीएसटी विकल्प जैसे विषयों पर लिए गए निर्णयों को भी महत्वपूर्ण बताया। कृषि सहायता सेवाओं की कुछ निर्धारित श्रेणियों को जीएसटी से छूट देने की सिफारिश को भी संबंधित क्षेत्रों के लिए राहतकारी कदम माना गया है।

सिफारिशों को जल्द लागू करने की मांग
अमर पारवानी ने कहा कि 57वीं जीएसटी परिषद की सिफारिशें केवल कर दरों में बदलाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका उद्देश्य जीएसटी व्यवस्था को अधिक सरल और पारदर्शी बनाना, वास्तविक व्यापारियों का भरोसा बढ़ाना तथा कारोबार की लागत और अनुपालन संबंधी परेशानियों को कम करना भी है।

उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जीएसटी परिषद के सभी सदस्यों, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) तथा वित्त मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आग्रह किया कि इन सिफारिशों को आवश्यक अधिसूचनाओं, परिपत्रों और विधायी संशोधनों के माध्यम से शीघ्र लागू किया जाए, ताकि देशभर के करोड़ों व्यापारियों को इनका वास्तविक लाभ मिल सके।

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