धर्म डेस्क। सनातन परंपरा में महापर्व दीपावली रोशनी, उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की पावन स्मृति में दीपमाला सजाने की यह प्रथा सदियों से चली आ रही है। शास्त्रों और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दीवाली की रात 13 दीपक प्रज्वलित करने का विशेष और चमत्कारी महत्व माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ’13’ की संख्या घर में धन, वैभव, आरोग्यता और सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित करती है। इन दीपकों को घर के निश्चित स्थानों पर स्थापित करने से संपूर्ण घर का ऊर्जा चक्र सक्रिय हो जाता है, जिससे नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और घर में देवी लक्ष्मी का स्थायी वास बनता है।
आइए जानते हैं दीवाली पर 13 दीपक जलाने का महत्व, सही क्रम और उन्हें रखने के प्रमुख स्थान-
पहला दीपक कहां रखें? (मुख्य द्वार का महत्व)
- स्थान: दीवाली पर सबसे पहला दीपक घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर रखा जाता है।
- महत्व: मुख्य द्वार पर रखा जाने वाला यह प्रथम दीपक धन की देवी मां लक्ष्मी के स्वागत का संकेत देता है और घर से नकारात्मक ऊर्जा, दरिद्रता और क्लेश को बाहर निकालता है। इससे घर में धन-धान्य की निरंतर बरकत बनी रहती है।
13 दीपकों का क्रम और उनके स्थान अनुसार प्रभाव
शास्त्रों और वास्तु के अनुसार, इन 13 दीपकों को अलग-अलग महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थापित करने से भिन्न-भिन्न शुभ फलों की प्राप्ति होती है-
- पहले 2 दीपक (घर का मुख्य द्वार): घर की चौखट के दोनों ओर स्थापित करें। यह घर की सुरक्षा और बुरी शक्तियों को बाहर रखने के लिए जलाया जाता है।
- तीसरा दीपक (पूजा स्थल/मंदिर): घर के देवस्थान में जलाएं। यह देवी-देवताओं की निरंतर कृपा और परिवार में आध्यात्मिक शांति बनाए रखता है।
- चौथा दीपक (रसोई घर): रसोई में दीपक प्रज्वलित करना देवी अन्नपूर्णा का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रतीक है, जिससे घर में कभी अन्न और भोजन की कमी नहीं होती।
- पांचवा दीपक (तुलसी का चौरा): मां तुलसी के पौधे के समीप यह दीपक जलाएं। यह परिवार के सदस्यों के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और मानसिक शांति का कारक बनता है।
- छठा दीपक (घर का आंगन/ब्रह्म स्थान): आंगन में दीपक रखने से घर का वातावरण पवित्र और शुद्ध होता है।
- बाकी 7 दीपक (छत, मुंडेर, खिड़कियां और अन्य कोने)-
- खिड़कियों पर: आसपास की वायु और ऊर्जा को शुद्ध करने हेतु।
- छत और मुंडेर पर: आकाश और चारों दिशाओं से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बनाए रखने के लिए।
वास्तु शास्त्र: 13 दीपकों से कैसे सक्रिय होता है घर का ऊर्जा चक्र?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, मिट्टी के दीपकों में प्रज्वलित अग्नि तत्व घर के सभी कोनों से अंधकार और वास्तु दोषों को समाप्त करता है। जब घर के इन 13 निश्चित स्थानों (मुख्य द्वार, रसोई, तुलसी, मंदिर और छत) पर एक साथ दीपक जलते हैं, तो पूरे आवास का आभा मंडल (Aura) शुद्ध हो जाता है। यह विधान केवल सजावट का साधन नहीं, बल्कि परिवार के जीवन में सुख, शांति, सुरक्षा और समृद्धि लाने वाला एक अचूक अनुष्ठान है।






