रायपुर। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार आंदोलनरत पटवारियों की जायज मांगों पर बातचीत कर समाधान निकालने के बजाय उन्हें नौकरी से निलंबित करने आंदोलन कुचलने का प्रयास कर रही है। सैकड़ों की संख्या में पटवारियों को निलंबित कर दिया गया, नौकरी में ज्वाइन नहीं करने पर सर्विस इन ब्रेक की धमकी दी जा रही है। सरकार का यह रवैया बेहद अलोकतांत्रिक, तानाशाहीपूर्ण और निंदनीय है।
कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें निलंबित करना भाजपा सरकार की दमनकारी कार्यशैली को उजागर करता है। पटवारियों को आंदोलन के लिए मजबूर करने वाली सरकार अब अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए धमकी और दबाव का सहारा ले रही है। पिछले खरीफ सीजन के पहले भी पटवारी आंदोलनरत थे। उस समय सरकार ने उनकी मांगों पर सहमति जताकर समाधान का भरोसा दिया था। सवाल यह है कि एक साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने अपने ही आश्वासनों और सहमतियों को लागू क्यों नहीं किया? सरकार बताए कि पटवारियों के साथ हुई सहमति को अमल में लाने में किसने बाधा पैदा की?
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि धान खरीदी के महत्वपूर्ण समय में पटवारियों की हड़ताल एक महीने से अधिक समय से जारी है। इसका सीधा खामियाजा प्रदेश के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसान धान बेचने के लिए पंजीयन नहीं करा पा रहे हैं। तूफान और बेमौसम बारिश से खराब हुई फसलों का सर्वे प्रभावित हो रहा है, जिसके कारण प्रभावित किसानों को फसल बीमा का लाभ मिलने में देरी और परेशानी हो रही है। किसानों की मेहनत, उनकी फसल और उनकी आर्थिक सुरक्षा दांव पर लगी है, लेकिन सरकार को किसानों की चिंता करने के बजाय अपनी जिद और अहंकार की पड़ी है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार की हठधर्मिता ने किसानों को दोहरी मुसीबत में डाल दिया है। एक तरफ धान खरीदी की तैयारी और पंजीयन को लेकर अनिश्चितता है, दूसरी तरफ पटवारियों की हड़ताल के कारण राजस्व संबंधी जरूरी कामकाज ठप पड़े हैं। किसानों को हो रही आर्थिक क्षति और मानसिक परेशानी की नैतिक जिम्मेदारी से सरकार बच नहीं सकती।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार एक ओर सुशासन का ढिंढोरा पीटती है, दूसरी ओर कर्मचारियों की आवाज दबाने के लिए बर्खास्तगी की धमकी देती है। सरकार स्पष्ट करे कि कर्मचारियों से किए गए वादे पूरे करना उसकी जिम्मेदारी है या उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी देना ही उसका सुशासन है? भाजपा सरकार तत्काल अपनी हठधर्मिता छोड़े, पटवारियों के साथ वार्ता कर उनकी मांगों पर पूर्व में बनी सहमति को लागू करे और आंदोलन समाप्त कराने के लिए ठोस पहल करे। सरकार की जिद की सजा प्रदेश के किसानों को नहीं मिलनी चाहिए। धान पंजीयन, फसल क्षति सर्वे और किसानों के राजस्व संबंधी कार्य तत्काल सुचारू किए जाएं। किसानों को हुए नुकसान की भरपाई और उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।






