रायपुर। दिवाली के पावन अवसर पर आतिशबाजी और पटाखों से आँखों को होने वाले खतरों को लेकर छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल के नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं डायरेक्टर डॉ. अभिषेक मेहरा ने लोगों से सुरक्षित दिवाली मनाने की अपील की है। डॉ. मेहरा ने कहा कि त्योहार का आनंद तभी पूरा होता है जब परिवार सुरक्षित रहे और आंखों जैसी कीमती रोशनी को कोई नुकसान न पहुँचे।
अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक मेहरा के अनुसार, हर साल दिवाली के दौरान पटाखों से आँखों की चोटों के कई मामले सामने आते हैं, जिनमें बच्चे और युवा ज्यादा प्रभावित होते हैं। चिंगारी, धुआँ, उड़ते हुए कण और अचानक विस्फोट से कॉर्निया को नुकसान, जलन, संक्रमण या गंभीर मामलों में दृष्टि हानि तक हो सकती है।
सुरक्षित दिवाली मनाने के लिए सुझाव :-
सुरक्षा चश्मा जरूर पहनें : पटाखे फोड़ते या देख रहे समय पॉलीकार्बोनेट वाले सुरक्षा गॉगल्स पहनें। सामान्य धूप का चश्मा पर्याप्त नहीं होता।
सुरक्षित दूरी बनाए रखें : छोटे पटाखों से कम से कम 5 मीटर और रॉकेट जैसी ऊंची आतिशबाजी से और ज्यादा दूरी रखें। बच्चों को कभी भी पटाखे न छूने दें और हमेशा वयस्कों की निगरानी में रखें।
पटाखे हाथ में न पकड़ें : आतिशबाजी को लंबे स्पार्कलर या अगरबत्ती से जलाएं। चेहरे या शरीर के करीब न रखें।
धुएँ और धूल से बचाव : आँखों में जलन होने पर रगड़ें नहीं। साफ पानी या लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स से धोएं। संपर्क लेंस इस्तेमाल करने वाले लोग इस दौरान चश्मा पहनना बेहतर समझें।
खुले स्थान पर मनाएँ : सँकरी गलियों, गाड़ियों या सूखी पत्तियों के पास पटाखे न फोड़ें। पास में पानी की बाल्टी जरूर रखें।
चोट लगने पर तुरंत अपनाए ये तरीका : आँख में पटाखे का कण या कुछ अन्य चीज जाने, जलन, लालिमा, दर्द या धुंधला दिखने पर तुरंत साफ पानी से धोएँ (अगर कोई भारी या धारदार वस्तु न घुसी हो) और बिना देर किए नेत्र विशेषज्ञ के पास पहुँचें। घरेलू नुस्खे, कज्जल या कोई दवा न लगाएं।
“दिवाली रोशनी का त्योहार है। आतिशबाजी का मतलब आँखों की रोशनी गँवाना नहीं होना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी से हम सब मिलकर सुरक्षित और खुशहाल दिवाली मना सकते हैं। बच्चे, बुजुर्ग और पहले से आँखों की समस्या वाले लोग विशेष सतर्कता बरतें। किसी भी समस्या पर छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल या नजदीकी नेत्र चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें।”
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डॉ. अभिषेक मेहरा, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ



