नेहरू मेडिकल कॉलेज में पहली बार 210 डॉक्टरों की संविदा भर्ती, वॉक-इन इंटरव्यू 20 दिसंबर को

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नेहरू मेडिकल कॉलेज में पहली बार 210 डॉक्टरों की संविदा भर्ती, वॉक-इन इंटरव्यू 20 दिसंबर को
नेहरू मेडिकल कॉलेज में पहली बार 210 डॉक्टरों की संविदा भर्ती, वॉक-इन इंटरव्यू 20 दिसंबर को

रायपुर के पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में पहली बार 210 डॉक्टरों की संविदा भर्ती के लिए वॉक-इन इंटरव्यू का आयोजन किया जा रहा है। यह इंटरव्यू 20 दिसंबर को दोपहर 12 बजे से होगा।

कॉलेज प्रशासन ने बताया कि इतने बड़े स्तर पर भर्ती के लिए एक दिन का समय निर्धारित किया गया है। पहले 100 से कम पदों के लिए वॉक-इन इंटरव्यू होते थे, लेकिन इस बार प्रक्रिया का दायरा काफी बढ़ाया गया है।

  • कार्डियो थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जरी (CTVS): 12 असिस्टेंट प्रोफेसर, 3 परयूजिनिस्ट, और 3 फिजिशियन असिस्टेंट के पद।
  • क्रिटिकल केयर, मेडिसिन, पीडियाट्रिक, एनीस्थीसिया, और कार्डियक एनीस्थीसिया: कुल 12 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति होगी।

  • असिस्टेंट प्रोफेसर: 56 पद
  • सीनियर रेसीडेंट: 106 पद

  • असिस्टेंट प्रोफेसर: ₹95,000 प्रति माह
  • एसोसिएट प्रोफेसर: ₹1.55 लाख प्रति माह
  • प्रोफेसर: ₹1.90 लाख प्रति माह
    कॉलेज के मुताबिक, निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में वेतन कम होने की वजह से कई डॉक्टर ज्वाइन करने से बच रहे हैं।

  • शपथपत्र विवाद: स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों से यह शपथपत्र मांगा है कि उनके यहां कोई सरकारी डॉक्टर सेवाएं नहीं दे रहे।
  • एनपीए विवाद: शासन ने एनपीए (नॉन प्रैक्टिस अलाउंस) लेने वाले डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक कर दिए हैं, जिससे नए डॉक्टर भर्ती को लेकर संकोच कर रहे हैं।

आंबेडकर अस्पताल: जनरल सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एसएन गोले ने इस्तीफा देकर निजी मेडिकल कॉलेज ज्वाइन किया।

डीकेएस अस्पताल: दो यूरो सर्जन, एक न्यूरो सर्जन और एक न्यूरोलॉजिस्ट ने भी इस्तीफा दिया है।

शपथपत्र और एनपीए विवाद के चलते प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों, जैसे राजनांदगांव, दुर्ग, रायगढ़, और आंबेडकर अस्पताल में डॉक्टरों की भर्ती और इस्तीफे की समस्या बनी हुई है।

निजी अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों में वेतन और अन्य सुविधाओं का अंतर, डॉक्टरों के नौकरी छोड़ने का प्रमुख कारण है।

इस विवाद को सुलझाने के लिए सरकार को त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा सके और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

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