
अंबिकापुर।
शहर के कोर्ट के पीछे स्थित क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां नगर निगम की टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के एक आवासीय मकान को ढहा दिया। सुबह करीब 8 बजे तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और नगर निगम के अधिकारी बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंचे और घर को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी।


स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रशासन ने मकान में रह रहे परिवार को अपना सामान तक निकालने का मौका नहीं दिया। परिवार के सदस्य रोते-बिलखते रहे, लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी।
बताया जा रहा है कि यह परिवार कई वर्षों से इसी मकान में निवास कर रहा था और वहीं से अपनी जीविका चला रहा था। प्रशासन की ओर से कार्रवाई के पीछे गैस प्लांट निर्माण का हवाला दिया गया है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि मकान ढहाने के बाद अधिकारियों ने कहा कि संबंधित नोटिस बाद में भेजा जाएगा।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया की भी खुलेआम अनदेखी की गई है। सवाल उठाया जा रहा है — क्या किसी नागरिक को बिना नोटिस और वैधानिक प्रक्रिया के बेघर किया जा सकता है?
प्रभावित परिवार ने न्याय की मांग करते हुए प्रशासन से उचित मुआवज़ा और पुनर्वास की अपील की है। साथ ही, इस मामले में उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है।
गों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया की भी खुलेआम अनदेखी की गई है। सवाल उठाया जा रहा है — क्या किसी नागरिक को बिना नोटिस और वैधानिक प्रक्रिया के बेघर किया जा सकता है?
प्रभावित परिवार ने न्याय की मांग करते हुए प्रशासन से उचित मुआवज़ा और पुनर्वास की अपील की है। साथ ही, इस मामले में उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है।




