
रायपुर की मशरूम फैक्ट्री में मजदूरों से गुलामी: क्या किसी ‘बड़े नाम’ को बचाने की हो रही है कोशिश?
खरोरा की मोजो मशरूम कंपनी से छुड़ाए गए 97 बंधुआ मजदूर, 47 नाबालिग भी शामिल; मारपीट, बंधक बनाकर श्रम, और प्रदूषण के गंभीर आरोपों के बावजूद ‘प्रभावशाली’ संचालकों पर अब तक कार्रवाई नहीं
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के खरोरा इलाके से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां मोजो मशरूम नामक कंपनी में दूसरे राज्यों से लाए गए 97 मजदूरों को बंधक बनाकर अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया जा रहा था। इनमें 47 नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापा मारकर सभी मजदूरों को मुक्त कराया, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक किसी भी कंपनी संचालक पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।


मजदूरों का दर्द: “मोबाइल छीना, भूखा रखा, पीटा गया”
मुक्त कराए गए मजदूरों में जौनपुर (यूपी) के गोलू और रवि ने बताया कि उन्हें और उनके परिवार को विपिन, विकास और नितेश तिवारी नाम के तीन लोगों ने काम के बहाने रायपुर बुलाया। यहां खरोरा स्थित उमाश्री राइस मिल परिसर में बनी मशरूम फैक्ट्री में पहुंचते ही उनके मोबाइल छीन लिए गए और उन्हें पूरी तरह बाहरी दुनिया से काट दिया गया। दिन में दो बार भोजन और रात 2 बजे तक काम की मजबूरी ने हालात को नर्क बना दिया था।
मजदूरी मांगने पर बेलचे से पीटा जाता था
मजदूरों ने आरोप लगाया कि जब भी वे अपनी मेहनत की मजदूरी मांगते, तो विपिन तिवारी उन्हें बेलचे से पीटता था। किसी को बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। उन्हें जानवरों की तरह रखा जाता था और विरोध करने पर महिलाओं और बच्चों तक को नहीं बख्शा जाता।

प्रशासनिक कार्रवाई या रसूखदारों को बचाने की कोशिश?
शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन, पुलिस और बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारा और भयावह स्थिति में 97 मजदूरों को मुक्त कराया। लेकिन देर रात तक किसी भी संचालक पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
असली मालिक मोनिका खेतान का नाम गायब?
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मोजो मशरूम की वास्तविक प्रोपराइटर शहर की एक रसूखदार महिला मोनिका खेतान हैं। लेकिन एफआईआर या किसी आधिकारिक बयान में उनका नाम तक नहीं लिया गया है। इससे आशंका जताई जा रही है कि मामले को दबाने और असली गुनहगारों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
प्रदूषण और पर्यावरण की बर्बादी के भी गंभीर आरोप
यह पहला मौका नहीं है जब मोजो मशरूम और उमाश्री राइस मिल विवादों में आई है। ग्रामीणों ने पहले भी फैक्ट्री पर जहरीला प्रदूषण फैलाने, ज़मीन को बंजर बनाने और मवेशियों की मौत का कारण बनने का आरोप लगाया है। बिना ट्रीटमेंट के केमिकल युक्त गंदा पानी नालों में बहाया जाता है, जिससे भूजल जहरीला हो चुका है और ग्रामीण सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं।
अब सवाल यह है:
क्या प्रशासन सचमुच दोषियों को सज़ा दिलाएगा? या एक बार फिर पैसे और प्रभाव के दम पर इस मामले को दबा दिया जाएगा?







