रायपुर में प्रशासन बेबस, भू-माफिया बेखौफ: टेमरी में बुलडोजर कार्रवाई को ठेंगा, कई बार कार्रवाई फिर रजिस्ट्री हुई कैसे, अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल

रायपुर | राजधानी रायपुर के माना इलाके के टेमरी में जिला प्रशासन की साख दांव पर लगी है। जहाँ एक ओर राजस्व विभाग बुलडोजर चलाकर सड़कें तोड़ने का ‘दावा’ करता रहा, वहीं दूसरी ओर भू-माफिया कार्यालयों में बैठकर धड़ल्ले से उसी जमीन की रजिस्ट्री कराते रहे। राजस्व विभाग के ऑनलाइन रिकॉर्ड (भुइयां पोर्टल) से मिले दस्तावेजों ने प्रशासन के उन दावों की पोल खोल दी है, जिसमें अवैध प्लॉटिंग पर कड़ी कार्रवाई और खसरा बैन करने की बात कही गई थी।

प्रमाणों के अनुसार, खसरा नंबर 426/6 और 426/8 में अवैध प्लॉटिंग का खेल जारी है। जिला प्रशासन ने जनवरी 2026 में यहाँ पहली कार्रवाई की थी, जिसके बाद अब तक 4 से 5 बार सड़कों को तोड़ा जा चुका है। लेकिन चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इन्ही महीनों के दौरान रजिस्ट्रियां और नामांतरण की प्रक्रिया निरंतर जारी रही:

● 30 मार्च 2026 (खसरा 426/8): निर्मल जैन और राहुल जैन ने 0.0222 हेक्टेयर जमीन कंकना मंडल को बेची
● 27 अप्रैल 2026: गिरीश चतुर्वेदी से निर्मल जैन के नाम पर 0.2010 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री हुई।
● 28 अप्रैल 2026: गिरीश चतुर्वेदी से प्रवीण स्वर्णकार के नाम पर भी 0.2010 हेक्टेयर की रजिस्ट्री हुई।
● 13 मई 2026: प्रवीण स्वर्णकार ने इसे छोटे टुकड़ों में काटा और मधु जायसवाल को 0.0235 हेक्टेयर जमीन बेची।
● 15 मई 2026: प्रवीण स्वर्णकार ने बी.के. रामा राव को 0.0390 हेक्टेयर जमीन की एक और रजिस्ट्री की।

पूर्व में जिला पंचायत सीईओ सौरभ बाजपेयी और तहसीलदार राममूर्ति दीवान ने मीडिया को आश्वासन दिया था कि अवैध प्लॉटिंग करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी और संबंधित खसरा नंबरों की रजिस्ट्री पर तत्काल रोक (बैन) लगाई जाएगी। लेकिन टेमरी के इन ताजा मामलों ने स्पष्ट कर दिया है कि माफिया के रसूख के आगे अधिकारियों की चेतावनी महज कागजी साबित हुई है। कृषि भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर बेचना ‘रेरा’ (RERA) और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों का खुला उल्लंघन है।
जब राजस्व विभाग को पता है कि खसरा नंबरों पर अवैध प्लॉटिंग चल रही है, तो पंजीयन विभाग ने इन तारीखों पर रजिस्ट्रियां कैसे होने दीं? क्या भू-माफियाओं को विभाग के भीतर से ही संरक्षण प्राप्त है?
लोगों का कहना है कि, प्रशासन केवल सड़कों पर जेसीबी चलाकर खानापूर्ति करता है, जिसे माफिया रातभर में दोबारा बना लेते हैं। जब तक इन खसरा नंबरों को ‘ब्लैकलिस्ट’ नहीं किया जाएगा और प्रवीण स्वर्णकार व निर्मल जैन जैसे लोगों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होगा, तब तक यह अवैध कार्य नही रुकेगा।



