सिलतरा गोदावरी प्लांट हादसे में मजदूरों को मिलेगा न्याय – क्या प्रशासन करेगा कठोर कार्रवाई , या फिर गरीब मजदूरों की मौत पर महज़ मुआवज़े का ऐलान कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
रायपुर। राजधानी रायपुर के सिलतरा में गोदावरी प्लांट के अंदर निर्माण कार्य के दौरान ढांचा गिरने से 6 मजदूरों की मौके पर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है, सिलतरा के औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों की जान अक्सर इसी तरह दांव पर लगाई जाती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मजदूरों की मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या प्रशासन सिर्फ औपचारिक जांच और कागज़ी कार्रवाई तक ही सीमित रहेगा?
क्या गोदावरी प्लांट के जिम्मेदार प्रबंधकों पर हत्या जैसे गंभीर आरोपों में कार्रवाई होगी?
या फिर गरीब मजदूरों की मौत पर महज़ मुआवज़े का ऐलान कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
सच्चाई यह है कि सिलतरा के कई प्लांटों में मजदूरों की सुरक्षा के नाम पर केवल दिखावा होता है। न सुरक्षा उपकरण, न मानक नियमों का पालन और न ही कामगारों की जिंदगी की कोई कीमत। मजदूर दिन-रात पसीना बहाते हैं, लेकिन जब हादसा होता है तो उनके परिवारों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासन और प्रबंधन की लापरवाही का सीधा नतीजा है। सवाल उठता है कि अगर अब भी जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो क्या सिलतरा में मजदूरों की मौत का सिलसिला ऐसे ही जारी रहेगा?


