निजी डॉक्टर पर अवैध गर्भपात का संगीन आरोप, शिकायत के 4 महीने बाद भी स्वास्थ्य विभाग मौन

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निजी डॉक्टर पर अवैध गर्भपात का संगीन आरोप, शिकायत के 4 महीने बाद भी स्वास्थ्य विभाग मौन

रायपुर।राजधानी में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरंग के एक निजी अस्पताल के संचालक पर बलौदाबाजार के एक अन्य अस्पताल में अवैध गर्भपात जैसे गंभीर कृत्यों में शामिल होने का आरोप लगा है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) रायपुर को लिखित शिकायत सौंपे चार महीने बीत चुके हैं, मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कहा था कि जल्द ही टीम गठित कर सर्वे के लिए भेजा जाएगा और दोषी पाए जाने पर ठोस कार्यवाही की जाएगी लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। जिससे स्वास्थ्य विभाग की मंशा पर संदेह गहरा गया है। जब हमने इस मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने इस बारे जवाब देने से इनकार कर दिया।

मामला आरंग स्थित ‘साईं समर्थ हॉस्पिटल’ के संचालक डॉ. अर्जुन शर्मा से जुड़ा है। सीएमएचओ कार्यालय में 19 अगस्त 2025 को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, डॉ. शर्मा ने कुछ समय के लिए बलौदाबाजार स्थित ‘त्रिवेणी हॉस्पिटल’ में भी अपनी सेवाएं दी थीं। चौंकाने वाली बात यह है कि त्रिवेणी हॉस्पिटल की संचालिका एक सरकारी अस्पताल में पदस्थ नर्स है और यह पूरा अस्पताल उसी की देखरेख में संचालित हो रहा था। शिकायतकर्ता ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए पत्र में कहा है कि त्रिवेणी हॉस्पिटल में डॉ. शर्मा की सेवा अवधि के दौरान कई अनाधिकृत और अवैध गर्भपात किए गए। आरोप है कि डॉ. शर्मा को इन गैर-कानूनी गतिविधियों की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इस पर न तो कोई आपत्ति जताई और न ही इसे रोकने की कोशिश की। शिकायत के मुताबिक, जब इस संवेदनशील विषय पर उनसे सवाल किया गया, तो उन्होंने कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया। शिकायती पत्र में यह भी बताया गया है कि जब शिकायतकर्ता द्वारा इन अनैतिक कार्यों को रोकने का प्रयास किया गया और मामले ने तूल पकड़ा, तो दबाव में आकर डॉ. शर्मा ने 25 जुलाई 2025 को सीएमएचओ बलौदाबाजार को अपना त्यागपत्र सौंप दिया था।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इतने संगीन आरोपों वाली शिकायत पर चार महीने का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग गहरी नींद में है। इस सुस्ती के कारण न केवल जांच प्रभावित हो रही है, बल्कि सबूतों के नष्ट होने की भी आशंका है। यह मामला निजी अस्पतालों की मनमानी और स्वास्थ्य विभाग की लचर निगरानी को एक बार फिर उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि खबर सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर कोई संज्ञान लेता है या नहीं।

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