छत्तीसगढ़ के पाठ्यक्रम में वीर साहिबजादों की गाथा शामिल होना ऐतिहासिक फैसला, सिख समाज ने सीएम विष्णुदेव साय का जताया आभार

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छत्तीसगढ़ के पाठ्यक्रम में वीर साहिबजादों की गाथा शामिल होना ऐतिहासिक फैसला, सिख समाज ने सीएम विष्णुदेव साय का जताया आभार

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ सिख समाज (रजिस्टर्ड) ने राज्य सरकार द्वारा कक्षा 3 की हिंदी पाठ्यपुस्तक में दसवें गुरु जी के छोटे वीर साहिबजादों और की शौर्यगाथा को शामिल किए जाने का स्वागत करते हुए इसे नई पीढ़ी के चरित्र निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल बताया है।

रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस निर्णय से लाखों विद्यार्थियों को राष्ट्रभक्ति, नैतिक मूल्यों, साहस, आत्मसम्मान और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास का यह अध्याय विश्व इतिहास में अद्वितीय है, जहां दोनों छोटे साहिबजादों ने अत्याचार, प्रलोभन और धर्म परिवर्तन के दबाव के बावजूद अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और मुस्कुराते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।

 

सिख समाज ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि संस्कारित, साहसी और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। वीर साहिबजादों की गाथा विद्यार्थियों को सत्य, न्याय, राष्ट्रहित और मानवता की रक्षा के लिए सदैव अडिग रहने की प्रेरणा देगी।

पत्रकार वार्ता में समाज ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए घोषणा की कि छत्तीसगढ़ सिख समाज जल्द ही एक भव्य समारोह आयोजित कर उनका प्रदेश स्तरीय सामाजिक अभिनंदन करेगा।

इस अवसर पर देवेन्द्र सिंह सिब्बल, हरकिशन सिंह राजपूत, नरेंद्र सिंह हरगोत्रा, स्वर्ण सिंह चावला, कुलवंत सिंह खालसा, मनजीत सिंह भाटिया, देवेंद्र सिंह चावला, जसप्रीत सिंह चावला, इकबाल सिंह होरा, रणजीत सिंह खनूजा, अमृत सिंह सूर, इंदर पाल सिंह गांधी, गुरमीत सिंह छाबड़ा, मानवेंद्र सिंह डडियाला, जागीर सिंह बावा और अत्तर सिंह सहित समाज के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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