नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मौत की सजा देने के लिए फांसी की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि फिलहाल फांसी की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित करने का पर्याप्त आधार नहीं है।
याचिका में फांसी को क्रूर, अमानवीय और पीड़ादायक बताते हुए मौत की सजा के लिए जहरीले इंजेक्शन, गोली मारने समेत चार वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की मांग की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि उसका फैसला केंद्र सरकार को इस मुद्दे की समीक्षा करने से नहीं रोकता। सरकार विशेषज्ञ समिति के माध्यम से फांसी के विकल्प और कम पीड़ादायक तरीकों की जांच करा सकती है।
2017 में दायर हुई थी याचिका
वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने वर्ष 2017 में यह याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया था कि फांसी की प्रक्रिया में 40 मिनट से अधिक समय लग सकता है, जबकि गोली मारने से कुछ मिनट और जहरीले इंजेक्शन से करीब पांच मिनट में मौत होने की बात कही गई थी।
याचिका में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 354(5) को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई थी। इसी प्रावधान के तहत मौत की सजा पाए दोषी को गर्दन से तब तक लटकाया जाता है, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।
याचिकाकर्ता ने इस प्रक्रिया को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और गरिमा के अधिकार के खिलाफ बताया था। उन्होंने यह भी मांग की थी कि मौत की सजा पाए कैदी को फांसी और जहरीले इंजेक्शन में से किसी एक तरीके को चुनने का विकल्प दिया जाए।
केंद्र ने फांसी को बताया था तेज और आसान तरीका
केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में मौजूदा फांसी की व्यवस्था का बचाव किया था। गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा था कि फांसी से मौत तेज और आसान होती है तथा इससे कैदी की पीड़ा अनावश्यक रूप से नहीं बढ़ती। केंद्र ने जहरीले इंजेक्शन और गोली मारने जैसे तरीकों को भी फांसी से कम पीड़ादायक मानने से इनकार किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था बेहतर डेटा
मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की प्रक्रिया से होने वाली पीड़ा, मौत में लगने वाले समय और इससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर केंद्र सरकार से बेहतर डेटा मांगा था। कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने पर भी विचार किया था।
मई 2023 में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बताया था कि उन्होंने मौत की सजा देने के लिए बेहतर विकल्प तलाशने वाली विशेषज्ञ समिति गठित करने की सिफारिश की है। इसके बाद केंद्र सरकार समिति के सदस्यों के नाम पर विचार कर रही थी।






