रायपुर/लुंड्रा। वर्ष 2011 में सरकारी पद पर स्थायी पोस्टिंग दिलाने के नाम पर ₹1 लाख लेने के आरोप से जुड़े एक आपराधिक मामले में गिरफ्तार किए गए प्रवेश पाण्डे का नाम अब लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज के कार्यालय से जुड़ने के बाद चर्चा में है। उपलब्ध न्यायालयीन दस्तावेजों के सामने आने के बाद विधायक कार्यालय में कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले होने वाले पुलिस वेरिफिकेशन और आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
गौरेला थाने में दर्ज हुआ था मामला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उपलब्ध न्यायालयीन रिकॉर्ड के अनुसार, प्रवेश पाण्डे के विरुद्ध थाना गौरेला, जिला बिलासपुर में अपराध क्रमांक 275/2011 दर्ज किया गया था। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 का उल्लेख है। न्यायालयीन आदेश के अनुसार, इस प्रकरण में 16 अक्टूबर 2011 को प्रवेश पाण्डे की गिरफ्तारी हुई थी।
1 लाख में स्थायी पोस्टिंग दिलाने का आरोप
हाईकोर्ट के जमानत आदेश में अभियोजन की ओर से लगाए गए आरोपों का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, प्रवेश पाण्डे ने शिकायतकर्ता को कथित तौर पर यह विश्वास दिलाया था कि ₹1 लाख देने पर मंत्री से संपर्क कर राजीव गांधी शिक्षा मिशन में ब्लॉक कोऑर्डिनेटर के पद पर स्थायी पोस्टिंग दिलाने की व्यवस्था की जा सकती है।
अभियोजन के आरोप के मुताबिक, शिकायतकर्ता से रकम देने के लिए कथित तौर पर बार-बार फोन किए गए। इसी क्रम में 16 अक्टूबर 2011 को ₹15,000 प्राप्त करने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराए जाने पर उसी दिन प्रवेश पाण्डे को गिरफ्तार किया गया।


हाईकोर्ट से मिली थी जमानत
गिरफ्तारी के बाद प्रवेश पाण्डे की ओर से हाईकोर्ट में M.Cr.C. No. 3700/2011 के तहत जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। न्यायालयीन रिकॉर्ड के अनुसार, 1 दिसंबर 2011 को तत्कालीन न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा ने जमानत आवेदन स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।
अदालत ने ₹25,000 के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान राशि की एक जमानत प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि जमानत मिलना दोषसिद्धि नहीं है। उपलब्ध दस्तावेजों में अभियोजन के आरोप और जमानत संबंधी न्यायालयीन आदेश दर्ज हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्रवेश पाण्डे उक्त मामले में दोषी सिद्ध हुए थे। मामले की अंतिम न्यायिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
पहले भी विधायक कार्यालय से जुड़े रहे हैं पाण्डे
प्रवेश पाण्डे के बारे में यह भी बताया जा रहा है कि वे पूर्व में कांग्रेस शासनकाल में चिरमिरी विधायक विनय जायसवाल के कार्यालय सहायक के रूप में कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में उनके लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज के कार्यालय से जुड़े होने की बात सामने आ रही है।
वर्ष 2011 के पुराने मामले और उनकी वर्तमान भूमिका को लेकर अब यह सवाल चर्चा में है कि किसी विधायक के कार्यालय में जिम्मेदारी सौंपने से पहले संबंधित व्यक्ति की आपराधिक पृष्ठभूमि और पुलिस रिकॉर्ड का सत्यापन किस स्तर पर किया जाता है।
नियुक्ति से पहले हुआ था पुलिस वेरिफिकेशन?
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या प्रवेश पाण्डे को वर्तमान जिम्मेदारी सौंपने से पहले उनके पुराने आपराधिक प्रकरण की जानकारी जुटाई गई थी?
यदि विधायक कार्यालय को वर्ष 2011 के मामले की जानकारी थी, तो क्या नियुक्ति से पहले मामले की न्यायालयीन स्थिति और संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन कराया गया? वहीं, यदि कार्यालय को इस मामले की जानकारी नहीं थी, तो क्या नियुक्ति से पहले नियमित पुलिस वेरिफिकेशन अथवा बैकग्राउंड चेक कराया गया था?
ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि विधायक कार्यालय जनप्रतिनिधि की सार्वजनिक गतिविधियों और आम लोगों से सीधे संपर्क का प्रमुख केंद्र होता है।
विधायक कार्यालय और प्रवेश पाण्डे का पक्ष महत्वपूर्ण
उपलब्ध न्यायालयीन रिकॉर्ड फिलहाल वर्ष 2011 के मामले में गिरफ्तारी और जमानत से संबंधित जानकारी सामने रखते हैं। ऐसे में यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि प्रवेश पाण्डे वर्तमान में विधायक कार्यालय में किस पदनाम और किस प्रक्रिया के तहत कार्य कर रहे हैं।
लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज के कार्यालय की ओर से यह स्पष्ट किया जाना अपेक्षित है कि प्रवेश पाण्डे को कार्यालय से जोड़ने की प्रक्रिया क्या रही, क्या उनका पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया और क्या वर्ष 2011 में दर्ज मामले की जानकारी कार्यालय को थी।
वहीं, प्रवेश पाण्डे का पक्ष भी सामने आना जरूरी है, ताकि पुराने मामले की वर्तमान स्थिति और विधायक कार्यालय से उनकी मौजूदा भूमिका से जुड़े सभी तथ्यों को निष्पक्ष रूप से सामने रखा जा सके।






