कैट राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास, व्यापारिक संगठनों के साथ 18 बैठकों में आर्थिक विकास पर मंथन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्थानीय व्यापार को नई गति देने, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और प्रदेश की कला, संस्कृति व पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) एवं स्वदेशी व्यापारी मंच की ओर से दो दिवसीय व्यापक व्यापारी संवाद का आयोजन किया गया। इस दौरान कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक बीसी भरतिया तथा कैट के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन अमर पारवानी ने रायपुर के विभिन्न प्रमुख बाजारों और व्यापारिक क्षेत्रों का दौरा कर व्यापारिक संगठनों एवं व्यापारियों के साथ करीब 18 बैठकें कीं।

बैठकों में स्थानीय व्यापार को मजबूत करने, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने, व्यापार विस्तार, निर्यात की संभावनाओं और प्रदेश की आर्थिक क्षमता को नई दिशा देने सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। व्यापारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं, चुनौतियों और सुझावों को राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष रखा।

भरतिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आर्थिक विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। स्थानीय उत्पादों, आदिवासी कला एवं शिल्प, हस्तकला, पारंपरिक खान-पान, लोक संस्कृति और पर्यटन को देश-दुनिया के बाजार से जोड़कर व्यापार और रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय व्यापार और प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए व्यापारिक संगठनों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

उन्होंने आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों तथा पूंजी के प्रवाह को बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी कला, हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पाद, खान-पान और सांस्कृतिक विरासत को व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने की जरूरत है। साथ ही छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को विकसित कर उन्हें वेडिंग डेस्टिनेशन और पर्यटन आधारित व्यापारिक केंद्रों के रूप में बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए।

अमर पारवानी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान, प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत को व्यापारिक अवसरों में बदलने में व्यापारी समाज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। स्थानीय से राष्ट्रीय और राष्ट्रीय से वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार, उद्योग, सरकार और समाज के बीच बेहतर समन्वय से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सकती है।

भरतिया ने स्वदेशी व्यापार को बढ़ावा देने और ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा ‘लोकल को ग्लोबल’ की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय व्यापारिक परंपरा केवल लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘शुभ-लाभ’ की अवधारणा पर आधारित है। व्यापारियों की जिम्मेदारी उचित गुणवत्ता का सामान उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने और ग्राहकों के साथ विश्वास का संबंध बनाए रखने की भी है।

उन्होंने व्यापारियों से निर्यातक बनने की दिशा में सोच विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए नए बाजारों की संभावनाओं का अध्ययन किया जाना चाहिए। छत्तीसगढ़ के कई उत्पादों को बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार रणनीति के जरिए देश-विदेश में पहचान दिलाई जा सकती है।

उन्होंने सर्कुलर इकॉनमी की अवधारणा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उत्पन्न पूंजी का अधिक से अधिक हिस्सा स्थानीय अर्थव्यवस्था में ही घूमता रहे तो गांवों और छोटे शहरों में व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

दो दिवसीय प्रवास के दौरान हुए संवाद में कैट नेतृत्व ने व्यापारियों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय व्यापार और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए निरंतर संवाद एवं समन्वय के साथ आगे बढ़ने की बात कही।

इस अवसर पर कैट छत्तीसगढ़ के चेयरमैन जितेंद्र दोशी, विक्रम सिंहदेव, प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन, वाइस चेयरमैन सुरिंदर सिंह, जीवत बजाज, प्रदेश महामंत्री अवनीत सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष विजय पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र जग्गी सहित वासु माखीजा, राम मंधान, भरत जैन, राकेश ओचवानी और शंकर बजाज सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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