इस अवसर पर कैट के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन श्री अमर पारवानी ने आम नागरिकों एवं समस्त व्यापारियों से अपील की कि वे इस दीपावली पर विदेशी एवं कृत्रिम सजावटी उत्पादों के स्थान पर मिट्टी के पारंपरिक दीयों को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि मिट्टी का एक छोटा-सा दीया न केवल हमारे घरों को रोशन करता है, बल्कि किसी स्थानीय कारीगर के परिवार में भी खुशियों की रोशनी लेकर आता है।
श्री पारवानी ने कहा कि स्वदेशी केवल एक विचार नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने का संकल्प है। जब हम स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पाद खरीदते हैं, तो उनके हुनर, मेहनत और आत्मसम्मान को प्रोत्साहित करते हैं। दीपावली जैसे पावन पर्व पर स्वदेशी उत्पादों को अपनाना हमारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
YUVA CAIT छत्तीसगढ़ ने इस अभियान के माध्यम से संदेश दिया कि दीपावली का वास्तविक उत्सव तभी सार्थक होगा, जब त्योहार की खुशियां समाज के हर वर्ग तक पहुंचें और स्थानीय कारीगरों के घरों में भी समृद्धि के दीप प्रज्वलित हों। संगठन ने सभी नागरिकों से मिट्टी के दीये अपनाने, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और स्थानीय कारीगरों के जीवन में खुशियों की रोशनी फैलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में कैट, युवा कैट, महिला कैट एवं ट्रांसपोर्ट कैट के पदाधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इनमें श्री अमर पारवानी, श्री परमानंद जैन, श्री सुरिन्द्रर सिंह, श्री जीवत बजाज, श्री अवनीत सिंह, श्री भरत जैन, श्री कैलाष खेमान, श्री जय नानवानी, श्री हीरा माखीजा, श्री कांती पटेल, श्री रतनदीप सिंह, श्री भरत भूषण गुप्ता, श्री विक्रांत राठौर, श्री हिमांशु वर्मा, श्री संदीप गुप्ता, श्री गुरमीत सिंह एवं श्री ठाकुर लुल्ला सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।






