नए जीएसटी पंजीकरण में आ रही समस्याओं को लेकर दिए महत्वपूर्ण सुझाव
रायपुर : छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने नए जीएसटी पंजीकरण में आ रही समस्याओं को लेकर ग्रीवेंसेस रिड्रेसल कमिटी को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन 13 फरवरी 2025 को पत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसमें विभिन्न कठिनाइयों, उनके प्रभाव और उनके समाधान से संबंधित सुझाव शामिल हैं।
मुख्य समस्याएं और उनके प्रभाव:
- केंद्रीय जीएसटी के तहत पंजीकरण प्रक्रिया में देरी:
- केंद्रीकृत प्रसंस्करण सेल के कारण आवेदकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
- स्थानीय अधिकारियों के सीधे संपर्क में न होने से समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता।
- अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता को लेकर असमंजस:
- केंद्रीय जीएसटी विभाग राज्य के बाहर स्थित अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को मान्यता नहीं देता, जिससे व्यवसायों को बाधा हो रही है।
- किराए के परिसर में व्यवसाय संचालन से संबंधित समस्याएं:
- पंजीकरण के लिए किरायेदार के नाम पर बिजली बिल की अनिवार्यता लागू की जा रही है, जबकि वैध किराया समझौता मौजूद है।
- जीएसटी पंजीकरण में अनावश्यक देरी:
- 3-7 दिनों की तय सीमा के बावजूद, कई आवेदन 15 दिनों या उससे अधिक समय तक लंबित रहते हैं।
- कार्य अनुबंध क्षेत्र में सेवा प्रदाताओं की समस्या:
- पंजीकरण से पहले कार्य अनुबंध की मांग की जाती है, जिससे व्यवसायों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
चैंबर द्वारा सुझाए गए समाधान:
- केंद्रीय जीएसटी के पंजीकरण आवेदनों को स्थानीय अधिकारियों को सौंपा जाए।
- अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के लिए राज्य में निवास की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।
- किराया समझौता और संपत्ति मालिक की कर रसीद को व्यवसाय के स्थान के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।
- जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया में देरी को रोकने के लिए स्वतः अनुमोदन प्रणाली को लागू किया जाए।
- कार्य अनुबंध पंजीकरण के लिए वास्तविक कार्य आदेश की अनिवार्यता को हटाया जाए।
व्यवसायों को होगा लाभ
छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इन समस्याओं को दूर करने की अपील करते हुए कहा कि इससे राज्य के व्यापारियों और उद्योगपतियों को राहत मिलेगी और “ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस” को बढ़ावा मिलेगा। ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाया जाए ताकि नए व्यवसायों को कोई बाधा न आए।


