जंगल सफारी में बिना अनुमति और मास्टर प्लान से हटकर बना नया कार्यालय भवन
75 लाख की लागत से बने इस भवन को लेकर उठे सवाल
रायपुर:
रायपुर के नंदनवन जंगल सफारी परिसर में 75 लाख रुपये की लागत से एक नया कार्यालय भवन बनकर तैयार हो गया है, लेकिन इसके निर्माण को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस भवन का निर्माण केंद्रीय चिड़ीघर प्राधिकरण (सीजेडए) से बिना अनुमति के किया गया, और यह मास्टर प्लान के तय स्थान पर नहीं बल्कि अन्य स्थान पर बनवाया गया है।
निर्माण में नियमों की अनदेखी
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जंगल सफारी के नए कार्यालय भवन के निर्माण से पहले सीजेडए से जरूरी मंजूरी नहीं ली गई थी। सरकारी निर्माण कार्यों में तय प्रक्रियाओं के तहत किसी भी संरचना का निर्माण करने से पहले संबंधित विभागों से स्वीकृति लेना आवश्यक होता है, ताकि यह कार्य नियमानुसार और उचित स्थान पर हो सके। इस बार इन नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मास्टर प्लान से हटकर बनाई गईं नई इमारत
जंगल सफारी के मास्टर प्लान के अनुसार कार्यालय भवन के लिए एक निश्चित स्थान तय किया गया था, लेकिन यह भवन उस स्थान पर न बनकर कहीं और तैयार किया गया। इसके कारण यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस बदलाव को नियमानुसार किया गया या फिर बिना किसी पूर्व अनुमति के यह निर्णय लिया गया।
75 लाख की लागत और इसकी उपयोगिता
इस नए कार्यालय भवन के निर्माण पर 75 लाख रुपये की भारी लागत आई है। यह राशि छत्तीसगढ़ सरकार ने चिड़ियाघरों के विकास और उन्नयन योजना के तहत स्वीकृत की थी। हालांकि, निर्माण को लेकर उठ रहे सवालों के कारण यह निवेश भी जांच का विषय बन सकता है। क्या यह भवन जंगल सफारी के संचालन को बेहतर बनाएगा या फिर यह केवल सरकारी धन का अनुचित उपयोग साबित होगा, इस पर भी विचार किया जाना आवश्यक है।
आखिरकार, कब होगा उद्घाटन?
नए कार्यालय भवन के उद्घाटन की तारीख अभी तक तय नहीं हो पाई है, और सबकी नजरें इस पर हैं। अगर इस मामले में विवाद बढ़ता है, तो इसकी जांच भी हो सकती है। सीजेडए की अनुमति के बारे में पूछे जाने पर धम्मशील गणवीर, प्रबंधक संचालक ने बताया कि वे कार्यालय से लौटे हैं और अनुमति की कॉपी उनके पास ऑफिस में है।


