
सोशल मीडिया और OTT पर अश्लीलता का जाल : ‘हाउस अरेस्ट’ जैसे शो और बच्चों के भविष्य पर मंडराता गंभीर खतरा
नई दिल्ली। आज का युग डिजिटल क्रांति का युग है, जहां सोशल मीडिया और ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। सूचना, मनोरंजन, शिक्षा और संचार के इन सशक्त माध्यमों ने जहां अनगिनत अवसर प्रदान किए हैं, वहीं इनके दुरुपयोग ने समाज के समक्ष नई और गंभीर चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। विशेष रूप से, महज लोकप्रियता, व्यूज और त्वरित प्रसिद्धि पाने की अंधी दौड़ में कुछ व्यक्तियों और कंटेंट क्रिएटर्स द्वारा अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री का बेशर्मी से प्रदर्शन एक खतरनाक प्रवृत्ति बन चुका है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर हमारे बच्चों, युवाओं और समग्र सामाजिक ताने-बाने पर पड़ रहा है।


OTT प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ता अश्लीलता का चलन: ‘हाउस अरेस्ट’ एक उदाहरण
हाल ही में, एक OTT प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहा शो ‘हाउस अरेस्ट’, जिसे अभिनेता एजाज खान होस्ट कर रहे हैं, इस चिंता को और गहरा करता है। यह शो अपने कंटेंट को लेकर व्यापक विवादों में घिर गया है। दर्शकों, अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग यह आरोप लगा रहा है कि इस शो में मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता और फूहड़ता की सारी सीमाएं लांघ दी गई हैं। इसमें कथित तौर पर अत्यधिक बोल्ड दृश्य, अमर्यादित भाषा और ऐसे कंटेंट का प्रदर्शन किया जा रहा है जो भारतीय सामाजिक मूल्यों और नैतिकता के विरुद्ध है। यह स्थिति सवाल खड़ा करती है कि क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसे कार्यक्रमों को प्रसारित करने की अनुमति दी जानी चाहिए जो स्पष्ट रूप से समाज, विशेषकर बच्चों और किशोरों पर दुष्प्रभाव डाल रहे हैं?

सोशल मीडिया: बेलगाम अश्लीलता का मंच
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक और टिकटॉक (जहां प्रतिबंधित नहीं है) भी इस समस्या से अछूते नहीं हैं। कई इन्फ्लुएंसर और यूजर्स लाइक्स, फॉलोअर्स और कमाई के लालच में आपत्तिजनक वीडियो, रील्स और तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं। इनमें अभद्र भाषा, यौन रूप से स्पष्ट कंटेंट, और महिलाओं के प्रति अपमानजनक चित्रण आम होता जा रहा है। एल्गोरिदम की प्रकृति ऐसी है कि जो कंटेंट ज्यादा विवादित या सनसनीखेज होता है, वह कई बार तेजी से वायरल भी हो जाता है, जिससे ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स को और प्रोत्साहन मिलता है।
बच्चों और युवाओं पर विनाशकारी प्रभाव
विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों और समाजसेवियों का स्पष्ट मानना है कि इस प्रकार का कंटेंट बच्चों और युवाओं के कोमल मन पर गहरा और स्थायी नकारात्मक प्रभाव डालता है:
मानसिक स्वास्थ्य: लगातार अश्लील सामग्री के संपर्क में आने से बच्चों में चिंता, अवसाद, और आत्म-छवि से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
व्यवहार संबंधी समस्याएं: यह उनके व्यवहार में आक्रामकता, समय से पहले यौन जिज्ञासा और अनुचित यौन व्यवहार को बढ़ावा दे सकता है।
गलत आदर्शों का निर्माण: वे ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स को अपना रोल मॉडल मानने लगते हैं, जो अश्लीलता के माध्यम से प्रसिद्धि पाते हैं, जिससे उनके नैतिक मूल्यों का पतन होता है।
वास्तविकता से भटकाव: रिश्तों, प्रेम और यौनिकता के बारे में उनकी समझ विकृत हो सकती है, जो वास्तविक जीवन में उनके संबंधों को प्रभावित कर सकती है।
साइबरबुलिंग और शोषण का खतरा: वे स्वयं भी ऐसे कंटेंट का शिकार बन सकते हैं या दूसरों को प्रताड़ित करने में शामिल हो सकते हैं।
एक चिंतित अभिभावक ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग ज्ञान और सकारात्मक मनोरंजन के लिए करें। लेकिन जब ‘हाउस अरेस्ट’ जैसे शो या सोशल मीडिया पर अभद्र रील्स उनकी आंखों के सामने आती हैं, तो हम खुद को असहाय और डरा हुआ महसूस करते हैं। हम हर समय उनके साथ नहीं रह सकते।”
क्या लोकप्रियता के लिए अश्लीलता जायज है?
यह एक बुनियादी नैतिक प्रश्न है जिसका उत्तर स्पष्ट रूप से ‘नहीं’ होना चाहिए। लोकप्रियता या आर्थिक लाभ के लिए सामाजिक मूल्यों और बच्चों के भविष्य को दांव पर लगाना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। यह एक खतरनाक शॉर्टकट है जो दीर्घकालिक रूप से समाज को खोखला करता है।
सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही
यह एक गंभीर सवाल है कि क्या इन प्लेटफॉर्म्स की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? निश्चित रूप से बनती है। ये प्लेटफॉर्म्स केवल तकनीकी मध्यस्थ होने का दावा करके अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकते। उनकी जिम्मेदारी है:
मजबूत कंटेंट मॉडरेशन नीतियां: ऐसी नीतियां बनाना और उन्हें सख्ती से लागू करना जो अश्लीलता, अभद्रता और बाल-अनुपयुक्त सामग्री को रोकें।
प्रभावी रिपोर्टिंग और निवारण तंत्र: यूजर्स को आपत्तिजनक सामग्री की रिपोर्ट करने के लिए आसान और प्रभावी साधन उपलब्ध कराना और उन पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना।
आयु-उपयुक्त सामग्री के लिए प्रभावी तंत्र: एज-गेटिंग और वेरिफिकेशन सिस्टम को मजबूत करना ताकि बच्चों तक संवेदनशील सामग्री न पहुंचे।
एल्गोरिदम में सुधार: ऐसे एल्गोरिदम विकसित करना जो सकारात्मक और शैक्षिक सामग्री को बढ़ावा दें, न कि केवल सनसनीखेज और विवादित कंटेंट को।
सरकार और नियामकों की भूमिका
शिक्षाविदों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने सरकार और संबंधित नियामक संस्थाओं (जैसे सूचना और प्रसारण मंत्रालय) से पुरजोर अपील की है कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं:
स्पष्ट दिशानिर्देश और कानून: OTT प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सामग्री के लिए स्पष्ट, व्यापक और कड़े दिशानिर्देश तथा कानून बनाना।
प्रभावी निगरानी तंत्र: इन दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखने के लिए एक मजबूत निगरानी प्रणाली स्थापित करना।
कड़ी कार्रवाई और दंड का प्रावधान: नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, कंटेंट क्रिएटर्स और प्लेटफॉर्म्स पर भारी जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना।
आगे की राह: एक सामूहिक प्रयास
सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही अश्लीलता एक बहुआयामी समस्या है और इसका समाधान भी बहुस्तरीय और सामूहिक प्रयासों से ही संभव है:
जागरूकता अभियान: अभिभावकों, शिक्षकों और बच्चों के बीच डिजिटल साक्षरता और ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
पारिवारिक संवाद: माता-पिता को अपने बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना चाहिए और उन्हें सही-गलत का फर्क समझाना चाहिए।
सकारात्मक कंटेंट को प्रोत्साहन: समाज को सकारात्मक, रचनात्मक और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाले कंटेंट का समर्थन करना चाहिए।
नागरिक सक्रियता: आम नागरिकों को भी ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और संबंधित प्लेटफॉर्म्स पर रिपोर्ट करनी चाहिए।
यह समय है कि हम सब मिलकर इस डिजिटल महामारी के खिलाफ खड़े हों। यदि हमने आज इसे गंभीरता से नहीं लिया, तो यह न केवल हमारे बच्चों के वर्तमान को दूषित करेगा, बल्कि उनके भविष्य को भी अंधकारमय बना देगा। एक सुरक्षित, स्वस्थ और सकारात्मक डिजिटल वातावरण का निर्माण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, विशेषकर हमारी आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए।




