रंगमंच के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय— भूपेन्द्र साहू की कालजयी प्रस्तुति “भरथरी वैराग्य की गाथा”

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रंगमंच के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय— भूपेन्द्र साहू की कालजयी प्रस्तुति “भरथरी वैराग्य की गाथा”

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर और रंगकला को सहेजने वाले सुविख्यात निर्माता, निर्देशक, गीतकार और रंगकर्मी भूपेन्द्र साहू एक बार फिर इतिहास रचने जा रहे हैं। वे लेकर आ रहे हैं एक भव्य, सुसज्जित, कलात्मक और भावनाओं से सजी लोकगाथा पर आधारित नाट्य प्रस्तुति- “भरथरी वैराग्य की गाथा”।
यह नाटक छत्तीसगढ़ में पहली बार बड़े स्तर पर कई शहरों में मंचित होने वाला है, जिसमें लोकगाथाओं की आत्मा, परंपरा की गहराई,और आधुनिक मंचीय साज-सज्जा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
प्रेस वार्ता में भूपेन्द्र साहू ने बताया कि “भरथरी वैराग्य की गाथा” केवल एक नाटक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा, लोकसंस्कृति और जीवनदर्शन को मंच पर जीवंत करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा,
नाटक में शामिल हर कलाकार चाहे वह वाद्ययंत्र बजाने वाला हो या कोई पात्र निभाने वाला सभी ने दिन-रात मेहनत की है। यह प्रस्तुति हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का जरिया बनेगी।
कलाकारों का उत्साह चरम पर है, पर उससे भी अधिक उत्साह और जिज्ञासा कला प्रेमी, शोधकर्ता,साहित्यकार और सांस्कृतिक मर्मज्ञों में देखी जा रही है, जो इस अद्वितीय प्रस्तुति को देखने के लिए उत्सुक हैं।
“भरथरी” का मंचन प्रदेश के प्रमुख शहरों में किया जाएगा, जिसकी तारीख है, 10-11 जून रंग मंदिर (रायपुर) 12-13 जून कला मंदिर(भिलाई) 14-15 जून गोविंद राम ऑडिटोरियम (राजनांदगांव) व 16 जून को बलौदाबाजार जिला ऑडिटोरियम में मंचन की जाएगी। यह नाटक न केवल छत्तीसगढ़ी रंगमंच की पहचान को सशक्त करेगा, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने में भी मील का पत्थर साबित होगा।

निश्चित ही यह प्रस्तुति छत्तीसगढ़ के रंगकला इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रही है।

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