
सांसद-विधायक प्रशिक्षण वर्ग के तीसरे दिन प्रातः योग सत्र में अजय चंद्राकर ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को किया नमन
“राजनीति राष्ट्र सेवा का प्रतिबिंब बने, यही उपाध्याय जी का दर्शन था” — अजय चंद्राकर
सांसद-विधायक प्रशिक्षण वर्ग के तृतीय दिवस पर आज प्रातःकालीन योग सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक श्री अजय चंद्राकर ने भाग लिया। उन्होंने इस अवसर पर महान विचारक और राष्ट्रनायक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के राष्ट्रहित में किए गए संघर्षों और उनके आदर्शों पर अपने विचार साझा किए।


श्री चंद्राकर ने कहा कि जब देश लोकतंत्र के एक नए युग की ओर अग्रसर है, तब यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि राजनीति केवल सत्ता का साधन न होकर, राष्ट्र सेवा का प्रतिबिंब बने। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण में इसी चिंतन को आत्मसात करते हुए भारतीय राजनीति को वैचारिक दृष्टि से एक नई दिशा प्रदान की।
उन्होंने आगे कहा कि उपाध्याय जी ने ‘राष्ट्र प्रेम’, ‘सांस्कृतिक चेतना’ और ‘सुशासन’ को केंद्र में रखते हुए “पंच निष्ठा” का सिद्धांत दिया, जो आज भी प्रत्येक जनप्रतिनिधि और राजनीतिक संगठन के लिए एक प्रकाश स्तंभ की तरह मार्गदर्शन करता है।

चंद्राकर ने अपने संबोधन में कहा, “जो स्थान शरीर में प्राण का होता है, वही स्थान राष्ट्र में ‘विराट’ का है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने राष्ट्र के विराट की चेतना को जगाने के लिए अपने सम्पूर्ण जीवन को समर्पित कर दिया। आज समय की मांग है कि हम सभी जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता, संगठन के माध्यम से राष्ट्र के इस विराट के लिए स्वयं को समर्पित करें।”
सत्र के अंत में योग के माध्यम से आत्मचिंतन और राष्ट्र समर्पण की भावना को मजबूत करने का आह्वान भी किया गया।




