एआई और विशेषज्ञता का संगम: रायपुर के श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल में ‘मेटा विज़न एआई लैब’ से नेत्र चिकित्सा को नई दिशा

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एआई और विशेषज्ञता का संगम: रायपुर के श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल में ‘मेटा विज़न एआई लैब’ से नेत्र चिकित्सा को नई दिशा

रायपुर। तकनीक के तेज़ी से बदलते दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने मेडिकल साइंस को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया है। इसी कड़ी में रायपुर स्थित ने नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में दूरदर्शी पहल करते हुए अपने परिसर में ‘मेटा विज़न एआई लैब (एडवांस्ड ऑक्यूलर इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक यूनिट)’ की स्थापना की है।

यह अत्याधुनिक लैब आँखों की परत-दर-परत जाँच कर गंभीर नेत्र रोगों की शुरुआती अवस्था में पहचान करने में सक्षम है। जब देश-दुनिया में एआई के उपयोग पर बड़े मंचों पर चर्चा हो रही है, ऐसे समय में यह पहल सेंट्रल इंडिया के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

मशीन की सटीकता और डॉक्टरों का अनुभव

मेटा विज़न एआई लैब केवल आधुनिक मशीनों का संग्रह नहीं है, बल्कि यहाँ एआई तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों का वर्षों का अनुभव एक साथ कार्य करता है। इस यूनिट से जुड़ी मेडिकल टीम देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रशिक्षित है, जिनमें —

  • डॉ. चारुदत्त कलमकार – , नई दिल्ली
  • डॉ. अनिल के. गुप्ता – , चेन्नई
  • डॉ. अमृता मुखर्जी – , हैदराबाद
  • डॉ. जयेश पाटिल – शंकर नेत्रालय, चेन्नई
  • डॉ. शुभांक खरे –
  • डॉ. रोहित राव – एल. वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट, हैदराबाद

मशीनों से प्राप्त डेटा को विशेषज्ञों की समझ के साथ जोड़कर सटीक उपचार योजना तैयार की जाती है।

ग्लूकोमा: ‘नेत्र चोर’ की समय रहते पहचान

ग्लूकोमा को अक्सर ‘नेत्र चोर’ कहा जाता है क्योंकि यह बिना दर्द और स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे दृष्टि को प्रभावित करता है। एआई आधारित पेंटाकैम और अन्य उन्नत तकनीकों की मदद से अब इस बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही सटीक पहचान संभव है। इससे स्थायी दृष्टि हानि को रोका जा सकता है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी की बिना दर्द जाँच

डायबिटीज के बढ़ते मामलों के बीच रेटिना पर उसके प्रभाव को लेकर सतर्कता जरूरी है। एआई आधारित ओसीटी एंजियोप्लेक्स तकनीक से रेटिना की रक्त वाहिकाओं में लीकेज का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है — वह भी बिना डाई, बिना इंजेक्शन और बिना दर्द।

रेटिना विशेषज्ञ डॉ. जयेश पाटिल और डॉ. शुभांक खरे ग्रीन लेज़र सहित उन्नत उपचारों के माध्यम से मरीजों की दृष्टि सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

कॉर्निया और केराटोकोनस की प्रारंभिक पहचान

अधिक चश्मे का नंबर रखने वाले मरीजों में केराटोकोनस की संभावना रहती है। एआई आधारित पेंटाकैम तकनीक से कॉर्निया की टोपोग्राफी और टोमोग्राफी द्वारा इसकी शुरुआती अवस्था में पहचान संभव है।

डॉ. अमृता मुखर्जी कॉर्निया से जुड़े जटिल रोगों और डेसैक सर्जरी जैसे उन्नत उपचारों में विशेषज्ञ सेवाएँ दे रही हैं।

आधुनिक कैटरैक्ट सर्जरी और ‘कमांडो विज़न’

अब कैटरैक्ट सर्जरी केवल धुंधलापन दूर करने तक सीमित नहीं है। मल्टीफोकल और टॉरिक लेंस के उपयोग से मरीजों को दूर, नजदीक और इंटरमीडिएट—तीनों दूरी पर स्पष्ट दृष्टि मिलती है।

डॉ. अनिल के. गुप्ता और डॉ. चारुदत्त कलमकार द्वारा की जा रही सर्जरी में मेटा विज़न एआई लैब की इमेजिंग तकनीक निर्णायक भूमिका निभाती है। सर्जरी के बाद मरीज जिस संतुलित और स्पष्ट दृष्टि का अनुभव करते हैं, उसे आम भाषा में ‘कमांडो विज़न’ कहा जा रहा है।

ऑक्युलोप्लास्टी और आँसू नली की सटीक सर्जरी

ऑक्युलोप्लास्टी सर्जन डॉ. रोहित राव एआई आधारित एएस-ओसीटी तकनीक की मदद से आँसू नली, पलक और अन्य जटिल समस्याओं का सटीक डायग्नोसिस और सुरक्षित उपचार कर रहे हैं।

सेंट्रल इंडिया के लिए मील का पत्थर

मेटा विज़न एआई लैब की सेवाओं का लाभ अब केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में मरीज रायपुर पहुँच रहे हैं।

श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल को विश्वास है कि यह पहल आने वाले समय में छत्तीसगढ़ और सेंट्रल इंडिया में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक स्थायी मील का पत्थर साबित होगी—जहाँ एआई और एक्सपर्ट इंटेलिजेंस मिलकर मरीजों को बेहतर दृष्टि और बेहतर जीवन प्रदान करेंगे।

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