नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दलितों के साथ कथित भेदभाव और उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद हुए ‘शुद्धिकरण’ के मामले को लेकर बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है, जहां अनेक जातियां, धर्म, भाषाएं और संस्कृतियां हैं। इसके बावजूद दलितों के साथ भेदभाव और अत्याचार की घटनाएं आज भी सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि देश को एकजुट रखने के लिए सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना जरूरी है।
‘देश में दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई’
राहुल गांधी ने कहा कि देश में दो तरह की विचारधाराओं के बीच संघर्ष है। एक ओर डॉ. भीमराव आंबेडकर का संविधान है, जबकि दूसरी ओर आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों के साथ समाज में अलग-अलग स्तरों पर भेदभाव किया जाता है।
उन्होंने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी दलितों के साथ अत्याचार की घटनाएं सामने आती हैं। राहुल गांधी ने उदाहरण देते हुए कहा कि कहीं घड़ा छूने, मूंछ रखने, मंदिर में प्रवेश करने या घोड़ी पर बारात निकालने जैसी बातों को लेकर दलितों पर हमले की घटनाएं सामने आती हैं।
खरगे की सभा के बाद ‘शुद्धिकरण’ का जिक्र
राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित तौर पर कार्यक्रम स्थल के ‘शुद्धिकरण’ किए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि खरगे ने इस घटना को राज्यसभा में उठाते हुए अपना दुख व्यक्त किया था।
राहुल गांधी के मुताबिक, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मामले पर कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन बीजेपी के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कथित शुद्धिकरण को जायज ठहराया। राहुल गांधी ने इसी विरोधाभास पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे मामलों पर देश का ध्यान केंद्रित होना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि यदि किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के आधार पर इस तरह का भेदभाव किया गया है, तो संबंधित कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
चाय की दुकानों पर अलग-अलग कप का आरोप
राहुल गांधी ने दलितों के साथ रोजमर्रा के जीवन में होने वाले कथित भेदभाव का उदाहरण देते हुए चाय की दुकानों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर अलग-अलग समुदायों के लोगों के लिए अलग-अलग तरह के कप इस्तेमाल किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कथित तौर पर दलितों को पेपर या प्लास्टिक के कप दिए जाते हैं, जबकि अन्य लोगों के लिए कांच के कप का इस्तेमाल किया जाता है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि इस तरह के भेदभाव के रहते देश को सामाजिक रूप से एकजुट कैसे रखा जा सकता है।
राहुल गांधी ने कहा कि सामाजिक भेदभाव और छुआछूत जैसी प्रवृत्तियों के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है और संविधान में दिए गए समानता के अधिकार को जमीन पर लागू किया जाना चाहिए।






